पूनम शर्मा
असम की राजनीति में राष्ट्रवाद, पहचान और बाहरी प्रभाव का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। इसी बीच अब एक नया मोड़ तब आया है, जब पाकिस्तान के कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने असम की राजनीति और गौरव गोगोई से जुड़े विवाद पर चर्चा शुरू कर दी है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आमतौर पर पाकिस्तान का मीडिया असम जैसे राज्य की क्षेत्रीय राजनीति पर विस्तार से चर्चा नहीं करता। लेकिन हाल के दिनों में कुछ पाकिस्तानी एंकर और विश्लेषकों ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के उन बयानों पर प्रतिक्रिया दी है, जिनमें उन्होंने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर गंभीर सवाल उठाए थे।
पाकिस्तानी मीडिया की दिलचस्पी ने बढ़ाए सवाल
पाकिस्तानी मीडिया की इस एंट्री ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कुछ एंकरों ने यह साबित करने की कोशिश की कि गौरव गोगोई किसी तरह से “पाकिस्तान के एजेंट” नहीं हैं और मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है।
यही बात इस विवाद को और बड़ा बना रही है। क्योंकि अब यह केवल असम की स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है। जब किसी विदेशी मीडिया प्लेटफॉर्म की एंट्री होती है, तो विवाद का दायरा अपने आप बढ़ जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे ही पाकिस्तान का मीडिया असम के किसी नेता पर चर्चा करने लगता है, वैसे ही यह मामला राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचने लगता है।
हिमंत बिस्व सरमा का आक्रामक रुख
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा लंबे समय से अपने विरोधियों पर तीखे हमले करते रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने कांग्रेस और उसके नेताओं पर कई बार ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्हें भाजपा समर्थक राष्ट्रीय सुरक्षा और वैचारिक खतरे से जोड़कर देखते हैं।
गौरव गोगोई को लेकर उनके बयान पहले ही असम की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री केवल उन सवालों को उठा रहे हैं, जो जनता के मन में पहले से मौजूद हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक बता रही है। पार्टी का कहना है कि भाजपा विकास और बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भावनात्मक और राष्ट्रवादी मुद्दों को आगे बढ़ा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है पाकिस्तान का यह रुख
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान का मीडिया इस मामले में खुलकर प्रतिक्रिया दे रहा है। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब कोई विदेशी मीडिया संस्थान किसी भारतीय नेता के पक्ष में सफाई देता दिखाई देता है, तो इससे मतदाताओं के बीच संदेह पैदा हो सकता है।
भले ही पाकिस्तानी मीडिया यह दावा करे कि उसका असम चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन उसकी प्रतिक्रिया से जनता की धारणा जरूर प्रभावित हो सकती है। असम जैसे राज्य में सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दे बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।
इसी कारण यह विवाद आने वाले महीनों में और गहरा सकता है। चुनाव नजदीक आने के साथ राजनीतिक दल ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल अपने-अपने समर्थन आधार को मजबूत करने के लिए कर सकते हैं।
गौरव गोगोई के सामने चुनौती
गौरव गोगोई के लिए यह विवाद एक चुनौती भी है और अवसर भी। एक तरफ उन्हें लगातार आरोपों और राजनीतिक हमलों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ वे खुद को राजनीतिक निशाना बनाए जाने वाले नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकते हैं।
कांग्रेस इस मामले का इस्तेमाल यह कहने के लिए कर सकती है कि भाजपा असली मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल आरोपों की राजनीति कर रही है। वहीं भाजपा इस विवाद को कांग्रेस की विचारधारा और उसके राजनीतिक रुख पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।
सीमाओं के पार पहुँचा असम का राजनीतिक विवाद
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही है कि असम की राजनीति अब केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है। अब यहां के राजनीतिक विवाद विदेशी मीडिया तक पहुँच रहे हैं।
पाकिस्तानी मीडिया का उद्देश्य चाहे गौरव गोगोई का बचाव करना रहा हो या फिर हिमंत बिस्व सरमा के बयानों का विरोध करना, लेकिन इतना तय है कि इस विवाद ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है।
राजनीति में कई बार वास्तविकता से ज्यादा धारणा मायने रखती है। और जब कोई विवाद अंतरराष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन जाता है, तो उसकी राजनीतिक गंभीरता और भी बढ़ जाती है।