“झुमका गिरा रे, बरेली के बाज़ार में…सुरों से शहर तक

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समग्र समाचार सेवा
उत्तर प्रदेश,बरेली 5 मई : सुरों से शहर तक: एक गाने ने कैसे बदल दी पहचान

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे होते हैं जो सिर्फ सुने नहीं जाते, बल्कि एक दौर, एक एहसास और एक जगह की पहचान बन जाते हैं। ऐसा ही एक सदाबहार गीत है झुमका गिरा रे, जिसे अपनी जादुई आवाज़ से अमर बना दिया सुरों की मल्लिका Asha Bhosle ने।
1960 के दशक में आई फिल्म ‘मेरा साया’  का यह गीत आज भी लोगों की जुबान पर है। लेकिन शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक गाना किसी शहर की पहचान तक बदल सकता है—और वह शहर है ‘बरेली’ ।

जब एक गाना बना शहर की पहचान

झुमका गिरा रे, बरेली के बाज़ार में…”—इन शब्दों ने बरेली को पूरे देश में मशहूर कर दिया। यह सिर्फ एक लाइन नहीं रही, बल्कि बरेली की सांस्कृतिक पहचान बन गई। गाने की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस गीत को सम्मान देने का अनोखा तरीका चुना।
शहर में एक खास चौराहे पर 14 फीट ऊंचा पीतल का झुमका बनवाया गया, जिसे आज “झुमका चौक” के नाम से जाना जाता है। यह झुमका न सिर्फ एक कलात्मक संरचना है, बल्कि संगीत और संस्कृति के संगम का प्रतीक भी है।

गाने के पीछे की दिलचस्प कहानी

महान संगीतकार मदन मोहन ने एक दिन आशा भोसले को फोन कर कहा कि उनके लिए एक खास गाना तैयार है।
गाने के बोल सुनते ही आशा भोसले ने इसे अपने अंदाज़ में गाया और ऐसा जादू किया कि यह गीत हमेशा के लिए अमर हो गया। उनकी आवाज़ की मिठास और अदायगी ने इस गाने को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

पर्दे पर चुलबुली अदाएं, दिलों में बस गया गीत

फिल्म में यह गाना अभिनेत्री साधना  पर फिल्माया गया था। उनकी चुलबुली अदाओं और गाने की मस्ती ने इसे और भी खास बना दिया।
उस दौर में यह गीत सिर्फ एक हिट गाना नहीं, बल्कि एक ट्रेंड बन गया था। शादी-ब्याह से लेकर मंचीय कार्यक्रमों तक, हर जगह इसकी गूंज सुनाई देती थी।

83 साल का सफर और अमर विरासत

आशा भोसले का संगीत सफर 80 साल से भी ज्यादा लंबा रहा और उन्होंने हजारों गानों को अपनी आवाज़ दी। हाल ही में उनके निधन की खबर ने संगीत प्रेमियों को भावुक कर दिया। 92 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी आवाज़ आज भी जिंदा है।
उनकी पोती जनाई ने भावुक संदेश में कहा कि आशा भोसले सिर्फ परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी पूरी दुनिया थीं। उन्होंने लोगों के जीवन में खुशी और मुस्कान भरने का काम किया।

जब कला बन जाए अमर प्रतीक

“झुमका गिरा रे” सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि कला की ताकत कितनी बड़ी होती है। एक गीत ने न सिर्फ एक गायिका को अमर बना दिया, बल्कि एक शहर को नई पहचान भी दी।
आज जब भी कोई बरेली का नाम लेता है, तो इस गाने की धुन अपने आप कानों में गूंज उठती है। यही है सच्ची कला की ताकत—जो समय, पीढ़ियों और सीमाओं से परे जाकर दिलों में बस गया ।

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