अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार: दुनिया के प्रमुख नेता कहाँ से आ रहे हैं?

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पूनम शर्मा

अली ख़ामेनेई, जो ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता थे, का अंतिम संस्कार 3 जुलाई 2026 से तेहरान में शुरू हुआ। उनकी मृत्यु संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में 28 फरवरी को हुई थी। इस समारोह में विश्व के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया

ख़ामेनेई का अंतिम संस्कार सात दिनों तक चलेगा और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान ईरान और इराक के कई शहरों में होंगे।

पहला दिन (शुक्रवार) मुख्य समारोह का दिन है, जिसमें अधिकांश विदेशी नेता शामिल होंगे।
शनिवार और रविवार को तेहरान में सार्वजनिक समारोह होंगे, जहां उनके कफ़न को ग्रैंड मोसल्ला में रखा जाएगा।
सोमवार और मंगलवार को अंतिम संस्कार की यात्रा क़ोम की ओर बढ़ेगी।
बुधवार को इराक के नजफ़ और करबला में समारोह होंगे।
अंतिम संस्कार शुक्रवार को माशहद के इमाम रजा के मंदिर में होगा, जो ख़ामेनेई का जन्मस्थल भी है।

प्रमुख देशों के प्रतिनिधि

पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शेहबाज शरीफ इस अंतिम संस्कार में शिरकत करेंगे। पाकिस्तान ने युद्ध में मध्यस्थता और समझौते में अहम भूमिका निभाई है।
ताजिकिस्तान: राष्ट्रपति एमोमाली रहमोन भी शामिल होंगे।
आर्मेनिया: प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान प्रतिनिधित्व करेंगे।
जॉर्जिया: राष्ट्रपति मिकहील कवेलाश्विली आएंगे।
अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि
तुर्की: उपराष्ट्रपति जेव्देत यिलमाज़।
भारत: उप विदेश मंत्री पबित्रा मार्घेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन। साथ ही विपक्षी नेता सलमान खुर्शीद और महबूबा मुफ्ती भी।
चीन: वरिष्ठ विधायक हे वेई।
रूस: सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव।
अफगानिस्तान: तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी और उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर।
बांग्लादेश: संसद स्पीकर हाफिज़ुद्दीन अहमद।

सुरक्षा और चेतावनी

ख़ामेनेई के पुत्र और वर्तमान सर्वोच्च नेता मोज़ताबा ख़ामेनेई सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि इज़राइल ने उन्हें निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरानी सेना ने अमेरिका और इज़राइल को कड़ी चेतावनी दी है कि किसी भी आक्रमण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी।

अंतिम संस्कार का महत्व

यह अंतिम संस्कार आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कारों में से एक माना जा रहा है, जो 1989 में आयतुल्लाह रूहुल्लाह खोमैनी के अंतिम संस्कार से भी बड़ा होगा .

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