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चुनाव कार्यक्रम:
- यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के फरवरी-मार्च में होने की संभावना है।
- चुनाव आयोग ने अभी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।
- पिछली बार (2022) की तरह इस बार भी मतदान कई चरणों में होगा।
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राजनीतिक समीकरण:
- सीधी लड़ाई भाजपा-एनडीए (योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में) और विपक्षी इंडिया गठबंधन (समाजवादी पार्टी, कांग्रेस) के बीच।
- सपा-कांग्रेस में सीट बंटवारे की चर्चा, कांग्रेस को 60-80 सीटें मिल सकती हैं।
- बसपा (मायावती) भी कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बनाएगी।
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सीटों की स्थिति और वोटर डाटा:
- यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें (84 अनुसूचित जाति, 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित)।
- बहुमत के लिए 202 सीटें जरूरी।
- 75 जिले और 80 लोकसभा क्षेत्र, भारत का सबसे बड़ा विधानसभा चुनाव।
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2022 का चुनाव:
- 10 फरवरी से 7 मार्च 2022 तक 7 चरणों में मतदान।
- एनडीए (भाजपा गठबंधन) को 273 सीटें, सपा मुख्य विपक्ष।
- वोटिंग फीसदी: 61.03%।
- भाजपा लगातार दो बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने वाली पहली पार्टी बनी (1985 के बाद पहली बार)।
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ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अपडेट:
- यूपी के पुराने मतदाता सूची में 15 करोड़ नाम थे, जिसमें से 12 करोड़ मतदाताओं ने फॉर्म सत्यापित कर जमा किया (81% रेस्पॉन्स)।
- करीब 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए
समग्र समाचार सेवा
लखनऊ 14 जुलाई :उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी अपने चरम पर है और राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं। अनुमान है कि यह चुनाव फरवरी-मार्च में होंगे, हालांकि चुनाव आयोग ने अब तक आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। पिछली बार की तरह इस बार भी मतदान कई चरणों में संपन्न होगा। मुख्य मुकाबला भाजपा-एनडीए (योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में) और विपक्षी इंडिया गठबंधन (समाजवादी पार्टी, कांग्रेस) के बीच है। सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर मंथन चल रहा है, जहां कांग्रेस को लगभग 60-80 सीटें मिल सकती हैं। मायावती की बसपा भी कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बनाएगी, जिससे चुनाव और रोचक हो सकता है।
यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें 84 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 202 सीटें चाहिए। राज्य के 75 जिले और 80 लोकसभा क्षेत्र इसे भारत का सबसे बड़ा विधानसभा चुनाव बनाते हैं।
2022 का चुनाव सात चरणों में हुआ था, जिसमें एनडीए ने 273 सीटें जीतकर इतिहास रचा था—भाजपा 1985 के बाद लगातार दो बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में लौटी। उस चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 61.03% रहा। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए 2026 में जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 15 करोड़ नामों में से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए, जबकि 12 करोड़ मतदाताओं ने अपने फॉर्म सत्यापित किए।
राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ है: मिल्कीपुर उपचुनाव को भाजपा ने प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया, और योगी आदित्यनाथ ने सपा के PDA नारे को ‘दंगाई, अपराधी उत्पादन केंद्र’ बताया। वहीं, अखिलेश यादव ने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों को ‘साइकिल’ चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ाने तथा पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के सम्मान की बात दोहराई। कांग्रेस कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए इच्छुक नहीं दिख रही, खासकर गाजियाबाद सदर और खेयर जैसी सीटों पर। 2022 के कुछ प्रमुख विजेताओं में आगरा कैंट से डॉ. जी.एस. धर्मेश (भाजपा), अखबरपुर से राम अचल राजभर (सपा), बरेली से डॉ. अरुण कुमार (भाजपा), कैराना से नाहिद हसन (सपा), लखनऊ ईस्ट से अशुतोष टंडन (भाजपा) और वाराणसी नॉर्थ से रविन्द्र जायसवाल (भाजपा) शामिल हैं। कुल मिलाकर, यूपी चुनाव न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में भी निर्णायक साबित होंगे।