16 जून दैनिक राशिफल एवं पंचांग

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🐏मेष
किसी मांगलिक कार्य में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। किसी वरिष्ठ प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन व सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार से लाभ होगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कष्ट व भय सताएंगे। भाग्य का साथ मिलेगा।

🐂वृष
राजभय रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। शारीरिक कष्ट संभव है। यात्रा में जल्दबाजी न करें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। भागदौड़ अधिक रहेगी। थकान व कमजोरी महसूस होगी। आय में निश्चितता रहेगी। व्यापार ठीक चलेगा। निवेश सोच-समझकर करें।

👫मिथुन
कुबुद्धि हावी रहेगी। चोट व रोग से बचें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार मनोनुकूल लाभ देगा। किसी बड़ी समस्या से मुक्ति मिल सकती है। किसी न्यायपूर्ण बात का भी विरोध हो सकता है। विवाद न करें।

🦀कर्क
चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। यश बढ़ेगा। दूर से शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी। घर में मेहमानों का आगमन होगा। कोई मांगलिक कार्य हो सकता है। आत्मविश्वास बढ़ेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। प्रसन्नता बनी रहेगी।

🐅सिंह
प्रयास सफल रहेंगे। सामाजिक कार्यों में रुचि रहेगी। मान-सम्मान मिलेगा। नौकरी में प्रशंसा होगी। कार्यसिद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी। चोट व रोग से बचें। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी व्यक्ति के बहकावे में न आएं। व्यापार ठीक चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा।

🙍‍♀️कन्या
शत्रु पस्त होंगे। सुख के साधनों की प्राप्ति पर व्यय होगा। धनलाभ के अवसर हाथ आएंगे। भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होगी। बड़ा लाभ हो सकता है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता मिलेगी। भाग्य का साथ रहेगा। शेयर मार्केट से लाभ होगा।

⚖️तुला
शरीर में कमर व घुटने आदि के दर्द से परेशानी हो सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। शत्रुभय रहेगा। कोर्ट व कचहरी के कार्य अनुकूल रहेंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। भाइयों का सहयोग मिलेगा। परिवार में मांगलिक कार्य हो सकता है।

🦂वृश्चिक
कुसगंति से बचें। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। पुराना रोग उभर सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति की बातों में न आएं। कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर करें। व्यापार अच्‍छा चलेगा। नौकरी में मातहतों से कहासुनी हो सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें।

🏹धनु
धार्मिक अनुष्ठान पूजा-पाठ इत्यादि का कार्यक्रम आयोजित हो सकता है। कोर्ट-कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। मानसिक शांति रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। समय अनुकूल है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। शारीरिक कष्ट संभव है।

🐊मकर
सुख के साधन प्राप्त होंगे। नई योजना बनेगी। तत्काल लाभ नहीं मिलेगा। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक काम करने की इच्छा रहेगी। मान-सम्मान मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

🍯कुंभ
कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक कष्ट संभव है। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। नौकरी में चैन रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। प्रमाद न करें।

🐟मीन
पुराना रोग उभर सकता है। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। किसी व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है। स्वाभिमान को ठेस लग सकती है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी।

 

🎁🎂🌷🦚🦜🙏🏵️🌳🌸🍁
दिनाँक:-16/06/2026,मंगलवार
द्वितीया, शुक्ल पक्ष,
ज्येष्ठ
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि——— द्वितीया 24:51:54. तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र———– आर्द्रा 16:11:31
योग————– वृद्वि 24:33:48
करण———- बालव 14:38:40
करण———- कौलव 24:51:54
वार———————- मंगलवार
माह————————- ज्येष्ठ
चन्द्र राशि—————- मिथुन
सूर्य राशि—————– मिथुन
रितु————————- ग्रीष्म
आयन——————- उत्तरायण
संवत्सर——————- पराभव
संवत्सर (उत्तर) ——————रौद्र
विक्रम संवत————— 2083
गुजराती संवत————- 2082
शक संवत—————– 1948
कलि संवत—————- 5127

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:24:55
सूर्यास्त—————- 19:15:01
दिन काल————- 13:50:05
रात्री काल————- 10:10:01
चंद्रोदय————— 06:15:12
चंद्रास्त—————- 20:54:48

लग्न—- मिथुन 0°40′ , 60°40′

सूर्य नक्षत्र————— मृगशिरा
चन्द्र नक्षत्र——————- आर्द्रा
नक्षत्र पाया—————— रजत

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

घ—- आर्द्रा 05:37:39

ङ—- आर्द्रा 10:54:01

छ—-आर्द्रा 16:11:31

के—- पुनर्वसु 21:30:18

को—- पुनर्वसु 26:50:33

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= मिथुन 00°12 , मृगशिरा 3 का
चन्द्र= मिथुन 13°30 , आर्द्रा 2 घ
बुध = मिथुन 25°52 ‘ पुनर्वसु 2 को
शु क्र= कर्क 08°05, पुष्य 2 हे
मंगल= मेष 26°17 °23 भरणी 4 लो
गुरु= कर्क 02°33 पुनर्वसु, 4 ही
शनि=मीन 19°30 ‘ रेवती , 1 दे
राहू=(व) कुम्भ 09°14 शतभिषा, 1 गो
केतु= (व) सिंह 09°14 मघा 3 मू
============================

🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩

राहू काल 15:48 – 17:31 अशुभ
यम घंटा 08:52 – 10:36 अशुभ
गुली काल 12:20 – 14:04 अशुभ
अभिजित 11:52 – 12:48 शुभ
दूर मुहूर्त 08:11 – 09:06 अशुभ
दूर मुहूर्त 23:19 – 24:14* अशुभ
वर्ज्यम 26:51* – 28:16* अशुभ
प्रदोष 19:15 – 21:18 शुभ

💮चोघडिया, दिन

रोग 05:25 – 07:09 अशुभ
उद्वेग 07:09 – 08:52 अशुभ
चर 08:52 10:36 शुभ
लाभ 10:36 12:20 शुभ
अमृत 12:20 – 14:04 शुभ
काल 14:04 15:48 अशुभ
शुभ 15:48 – 17:31 शुभ
रोग 17:31 – 19:15 अशुभ

🚩चोघडिया, रात

काल 19:15-20:31 अशुभ
लाभ 20:31 – 21:48 शुभ
उद्वेग 21:48 – 23:04 अशुभ
शुभ 23:04 – 24:20* शुभ
अमृत 24:20* – 25:36* शुभ
चर 25:36* – 26:53* शुभ
रोग 26:53* – 28:09* अशुभ
काल 28:09*29:25* अशुभ

💮होरा, दिन

मंगल 05:25- 06:34
सूर्य 06:34 -07:43
शुक्र 07:43- 08:52
बुध 08:52- 10:02
चन्द्र 10:02 -11:11
शनि 11:11- 12:20
बृहस्पति 12:20 -13:29
मंगल 13:29 -14:38
सूर्य 14:38- 15:48
शुक्र 15:48- 16:57
बुध 16:57- 18:06
चन्द्र 18:06 -19:15

🚩होरा, रात

शनि 19:15 -20:06
बृहस्पति 20:06- 20:57
मंगल 20:57- 21:48
सूर्य 21:48- 22:38
शुक्र 22:38- 23:29
बुध 23:29- 24:20
चन्द्र 24:20-25:11
शनि 25:11 @26:02
बृहस्पति 26:02- 26:53
मंगल 26:53-27:43
सूर्य 27:43- 28:34
शुक्र 28:34- 29:25

🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩

वृषभ > 03:20 से 05:26 तक
मिथुन > 05:26 से 07:40 तक
कर्क > 07:40 से 10:00 तक
सिंह > 10:00 से 12:16 तक
कन्या > 12:16 से 14:30 तक
तुला > 14:30 से 16:48 तक
वृश्चिक > 16:48 से 19:08 तक
धनु > 19:08 से 21:12 तक
मकर > 21:12 से 22:58 तक
कुम्भ > 22:58 से 00:34 तक
मीन > 00:34 से 02:02 तक
मेष > 02:02 से 03:28 तक
=======================

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान———— उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा गुड़ खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

2 + 3 + 1 = 6 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

सूर्य ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष

गौरी सन्निध्यौ = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

*प्रतिपदाक्षय

*चन्द्र दर्शन

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्र पत्नी तथैव च ।
पत्नी माता स्वमाता च पञ्चैता मातरः स्मृता ।।
।।चाoनीo।।

इन सब को आपनी माता समझें .
१. राजा की पत्नी
२. गुरु की पत्नी
३. मित्र की पत्नी
४. पत्नी की माँ
५. आपकी माँ.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: अक्षरब्रह्मयोग अo-8

सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च।
मूर्ध्न्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम्‌॥
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्‌।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्‌॥

सब इंद्रियों के द्वारों को रोककर तथा मन को हृद्देश में स्थिर करके, फिर उस जीते हुए मन द्वारा प्राण को मस्तक में स्थापित करके, परमात्म संबंधी योगधारणा में स्थित होकर जो पुरुष ‘ॐ’ इस एक अक्षर रूप ब्रह्म को उच्चारण करता हुआ और उसके अर्थस्वरूप मुझ निर्गुण ब्रह्म का चिंतन करता हुआ शरीर को त्यागकर जाता है, वह पुरुष परम गति को प्राप्त होता है
॥12-13॥

🙏आपका दिन मंगलमय हो

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