- सुप्रीम कोर्ट ने संयुक्त परिवार के खत्म होने और बच्चों को गैजेट्स देने को लेकर जताई नाराजगी
- न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की पीठ ने कहा—गैजेट्स का स्थान माता-पिता ले रहे हैं, यह आपदा है
- कोर्ट ने कहा—आज की पीढ़ी ज्यादा जानकार, लेकिन दबाव झेलने में कमजोर
- सॉलिसिटर जनरल ने भी माना—यह सामाजिक समस्या बनती जा रही है
- कोर्ट ने कहा—खुशी भौतिक चीजों से नहीं, मानवीय बंधन और परिवार से मिलती है
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली ,24 जुलाई :सुप्रीम कोर्ट ने संयुक्त परिवार प्रणाली के कमजोर पड़ने और बच्चों को माता-पिता के बजाय गैजेट्स (मोबाइल) थमा देने पर गहरी चिंता जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि यदि माता-पिता की जगह गैजेट्स लेते जा रहे हैं, तो यह समाज के लिए एक आपदा है। भविष्य में इससे पीढ़ियां मानवीय रिश्तों और बंधनों से पूरी तरह अनजान हो जाएंगी।
पीठ ने कहा—”संयुक्त परिवार एक विरासत है, लोग इसे समझते नहीं हैं। अगर माता-पिता की जगह गैजेट्स ने ले ली, तो भविष्य में स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।” कोर्ट ने यह भी कहा कि लोग व्हाट्सएप पर फैल रही सूचनाओं को ही ज्ञान मान लेते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत की चिंता से सहमति जताते हुए कहा कि मानवीय विश्वास और सहिष्णुता में कमी आ रही है।