समग्र समाचार सेवा
चंडीगढ़ | 30 जुलाई : सीबीआई ने हरियाणा की विशेष अदालत में दलील दी कि आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के मास्टरमाइंड रिभव ऋषि के करीबी सहयोगी थे और उन्होंने उससे आर्थिक व ‘अनैतिक’ लाभ लिए।
एजेंसी का दावा: अग्रवाल की संलिप्तता दो अलग-अलग विभागों में सामने आई, जहां उन्होंने वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर सरकारी खातों के संचालन को मंजूरी दी, जिससे सरकारी धन का गबन संभव हुआ।
शिक्षा विभाग में भूमिका:
दिसम्बर 2024 में शिक्षा सचिव बने।
सात दिन बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) के लिए खाता खोलने का प्रस्ताव आया।बिना प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया या अन्य बैंकों से दरें मंगाए सीधे मंजूरी दी और 100 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जबकि सीमा 50 करोड़ थी।
कृषि विभाग में भूमिका:
20 जून 2025 से कृषि सचिव और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष बने।
फिर से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता खोलने के लिए दखल दिया, जिसके बाद 10 करोड़ रुपये का फर्जी ट्रांसफर हुआ।
CBI का आरोप: अग्रवाल ने अधीनस्थों पर दबाव डालकर फाइलें मनमाफिक प्रोसेस कराईं और गबन की पूरी साजिश में सक्रिय भागीदारी निभाई।
वित्तीय अनियमितता:
101 फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन (182.93 करोड़)
33 फर्जी क्रेडिट ट्रांजेक्शन (132.39 करोड़)
कुल गबन 50.54 करोड़ रुपये।
रिभव ऋषि से करीबी संपर्क:
अग्रवाल को पता था कि ऋषि को बैंक से हटा दिया गया है, इसके बावजूद उनसे लगातार निजी संपर्क में रहे।
घोटाले से जुड़े लेन-देन में दोनों की बातचीत के सबूत मिले हैं।
अग्रवाल ने जमानत याचिका में खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उन्होंने कोई रिश्वत नहीं ली, सिर्फ प्रशासनिक मंजूरी दी।
सीबीआई का जवाब: अग्रवाल ने अधीनस्थों पर दबाव बनाकर फाइलें प्रोसेस कराईं और घोटाले में सक्रिय भूमिका निभाई।
अदालत में लगातार वित्तीय गड़बड़ियों, सरकारी धन के गबन और भ्रष्टाचार के आरोपों पर सुनवाई जारी है।