- भारत सरकार ने फिर दोहराया—अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, इसे कोई बदल नहीं सकता
- चीन द्वारा अरुणाचल के स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों को भारत ने “निरर्थक और तथ्यहीन” बताया।
- 27 स्थानों के भारतीय नामों का आधिकारिक नक्शे में दर्ज करना शुरू, जागरूकता और ऐतिहासिक महत्व को उजागर करने की पहल।
- रणनीतिक महत्व के स्थलों में लोंग जू (1959 भारत-चीन सैन्य टकराव स्थल), थागला (1962 युद्ध का शुरुआती मोर्चा), जैरामपुर, जसवंतगढ़ और शेर-ए-थापा मेमोरियल शामिल।
- MEA ने कहा—सीमा विवादों पर भारत-चीन के बीच संवाद में शांति और स्थिरता की आवश्यकता दोहराई; हाल ही में 36वीं WMCC बैठक में भी इस पर चर्चा।
- चीन 2017, 2021 और 2023 में अरुणाचल के लिए फर्जी नाम जारी कर चुका है, भारत ने सभी नामों को “फिक्टिशस” और “बेसलेस” बताया।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 11 अगस्त :अरुणाचल प्रदेश को लेकर एक बार फिर भारत और चीन के बीच नामकरण विवाद ने तूल पकड़ा है।
चीन द्वारा अरुणाचल के स्थानों के नाम बदलने की नयी कोशिशों पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, यह स्पष्ट और निर्विवाद तथ्य है, जिसे कोई भी बदल नहीं सकता।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने हाल ही में 27 स्थानों के आधिकारिक नाम अपने नक्शे में दर्ज किए हैं, ताकि उनकी ऐतिहासिक और भौगोलिक पहचान मजबूत की जा सके।
सरकार ने चीन द्वारा लगातार फर्जी नाम सूची जारी करने पर भी तीखी आपत्ति जताई, कहा—इन प्रयासों से न तो जमीनी हकीकत बदलती है, न भारत की स्थिति।
भारत-चीन सीमा वार्ता में भी भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है, और सीमा स्थिति का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।