पटना छात्र लाठीचार्ज पर भड़कीं रोहिणी आचार्य

BPSC TRE-4 अभ्यर्थियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राजद नेत्री ने सरकार को घेरा, कही बड़ी बात।

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  • पटना में बीपीएससी टीआरई (BPSC TRE-4) परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वाटर कैनन का प्रयोग किया गया।
  • राजद नेत्री रोहिणी आचार्य ने इस पुलिसिया कार्रवाई को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि ‘दमन’ ही सम्राट सरकार की कार्यसंस्कृति बन गई है।
  • रोहिणी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं की आवाज को लाठियों से दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा हनन है।

समग्र समाचार सेवा
पटना: बिहार की राजधानी पटना में रोजगार और परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। Navbharat Times की रिपोर्ट के अनुसार, BPSC TRE-4 परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। इस घटना के सामने आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेत्री रोहिणी आचार्य ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।

छात्रों पर लाठीचार्ज से उजागर हुई तानाशाही प्रवृत्ति

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया और अपने आधिकारिक बयानों के जरिए सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी न्यायसंगत मांगों को रख रहे विद्यार्थियों पर बार-बार पुलिस बल का प्रयोग करना और उन पर लाठियां बरसाना इस बात का सबूत है कि मौजूदा सरकार तानाशाही रवैये पर उतर आई है। उनके अनुसार, वर्षों तक कड़ी मेहनत करने वाले और सीमित संसाधनों में तैयारी करने वाले युवाओं पर इस तरह का शारीरिक उत्पीड़न उनके मनोबल को तोड़ने का काम करता है।

लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन और असंतोष

अपने तीखे तेवर दिखाते हुए रोहिणी ने कहा कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक और छात्र को अपनी आवाज शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का मौलिक अधिकार देता है। परीक्षा प्रणालियों में देरी, पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं जैसी समस्याओं का समय पर समाधान करने में विफल रहने के बाद, जब छात्र अपनी आवाज उठाते हैं तो उन्हें प्रशासन के जरिए चुप कराने की कोशिश की जाती है। उन्होंने चेताया कि पारदर्शी व्यवस्था मांगने पर न्याय देने के बजाय जब पुलिस छात्रों पर लाठियां बरसाती है, तो इससे पूरे राज्य के युवाओं के मन में असुरक्षा और गहरी निराशा की भावना पैदा होती है।

घायल छात्रों के इलाज और जवाबदेही की मांग

इस पूरी घटना के बाद रोहिणी आचार्य ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगें भी रखी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत लाठीचार्ज में घायल हुए सभी अभ्यर्थियों का समुचित और मुफ्त इलाज करवाना चाहिए। इसके अलावा, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और उन पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सलाह दी कि सरकार को दमनकारी नीतियों को त्यागकर छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक तरीके से बातचीत करनी चाहिए और अविलंब परीक्षा सुधार लागू करने चाहिए।

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