समग्र समाचार सेवा
कोलकाता, 29 अगस्त :पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बवाल तब मच गया जब कोलकाता पुलिस ने राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज कर ली। यह कार्रवाई शुक्रवार को आयोजित टीएमसी छात्र परिषद (TMCP) की रैली के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन के आरोप में की गई। अदालत ने ममता बनर्जी को कैथेड्रल रोड पर टीएमसीपी की स्थापना दिवस रैली आयोजित करने की अनुमति दी थी, लेकिन साफ निर्देश दिया था कि एक रास्ता खुला रखा जाए और कार्यक्रम तय समय सीमा के भीतर समाप्त हो।
पुलिस के मुताबिक, रैली ने हाईकोर्ट की शर्तों को दो जगहों पर तोड़ा। पहला, समय सीमा का उल्लंघन—रैली निर्धारित समय से अधिक देर तक चली। दूसरा, रैली के दौरान पूरी सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया, जिससे नागरिकों की आवाजाही में दिक्कतें आईं और कोर्ट द्वारा निर्धारित ‘एक रास्ता खुला रखने’ के आदेश की अवहेलना हुई। हैस्टिंग्स थाने में ममता बनर्जी व रैली आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आदेश के उल्लंघन में किस-किस की भूमिका रही और अन्य कौन-कौन लोग दोषी हैं।
रैली में ममता बनर्जी ने बीजेपी पर राज्य में डर का माहौल फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि उनके शासनकाल में पुलिस का मानवीय चेहरा था, जबकि बीजेपी ने पुलिस को “राक्षसी सत्ता” में बदल दिया है। ममता ने यह भी कहा कि अगर उनकी जनसभाओं की अनुमति प्रशासन नही देता, तो वे खुद सड़कों पर उतरेंगी और देखना चाहेंगी कि “कितने पत्थर और अंडे” उनके सामने हैं। उन्होंने बीजेपी पर विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग के जरिए धांधली और वोटर लिस्ट से नाम हटाने का भी आरोप लगाया।
एफआईआर और इस रैली ने बंगाल की राजनीति में प्रशासनिक अनुमति, सड़कों का उपयोग और कानून के शासन को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। पुलिस ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।