समग्र समाचार सेवा
काठमांडू, 30 अगस्त:नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 29 अगस्त तक नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर कम से कम 669 हो गई, जबकि तिब्बत में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इस आपदा में नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों की संख्या करीब 3,000 तक पहुंच गई है। नेपाल में 2,426 और तिब्बत में 554 लोगों के लापता होने की सूचना है। भारत में भी नेपाल से आने वाली नदियों में सात शव बरामद किए गए हैं, जिन्हें बाढ़ पीड़ितों का माना जा रहा है।
भारत और चीन से विशेष बचाव दल की मदद
बढ़ते संकट के बीच नेपाल सरकार ने पड़ोसी देशों से विशेष तकनीकी सहायता मांगी है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सहायता में सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, जीवित लोगों का पता लगाने वाली तकनीक, तेजी से फोरेंसिक और डीएनए जांच तथा शवों को सुरक्षित रखने के लिए मुर्दाघर सुविधाएं शामिल हैं। भारत की ओर से सुरंग बचाव के लिए 11 सदस्यीय विशेष तकनीकी दल को रवाना किया गया है, जबकि चीन का सुरंग बचाव दल भी पहुंचने वाला है।
बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में केंद्रित है। नेपाल में 933 जलविद्युत कर्मचारी लापता बताए गए हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि इनमें से 100 से अधिक लोग अभी भी सुरंगों के भीतर जीवित फंसे हो सकते हैं। बचाव दलों ने सुरंगों में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइप डाले हैं और कैमरे भेजने तथा मलबा हटाने की कोशिश की जा रही है। कुछ सुरंगों में करीब 1.2 से 1.5 मीटर तक कीचड़ जमा होने से अभियान बेहद कठिन बना हुआ है।
जलवायु परिवर्तन और हिमालयी जोखिम पर बढ़ी चिंता
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने आपदा के बीच हिमालय में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलावों और उससे उत्पन्न जोखिमों को समझने के लिए और अधिक शोध की जरूरत है। उनका कहना है कि इसका असर केवल नेपाल और निचले इलाकों में रहने वाली आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन जैसे पड़ोसी देशों पर भी पड़ सकता है।
चीन ने नेपाल को आपदा प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें, उपग्रह और जल-विज्ञान संबंधी आंकड़े तथा संभावित झीलों से जुड़े शुरुआती चेतावनी संबंधी महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराई हैं। दोनों देशों ने वास्तविक समय में जल संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान को बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।
नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसने अंतरराष्ट्रीय सहायता से इनकार नहीं किया है। विदेश मंत्री खनाल ने ऐसी खबरों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि तत्काल राहत के साथ-साथ बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होगा।