सागर शराब कांड: कौन हैं IPS अनुराग सुजानिया?
मुरैना के बाद सागर में जहरीली शराब से मौतों ने फिर बढ़ाए सवाल, 2014 बैच के IPS अधिकारी का करियर और विवाद चर्चा में
- मध्य प्रदेश के सागर और मोरेना जिलों में जहरीली शराब से हुई बड़ी त्रासदियों के समय आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया वहां बतौर एसपी तैनात रहे हैं।
- सागर के बंडा और शाहगढ़ में नकली शराब पीने से 22 लोगों की मौत के बाद आईपीएस अनुराग सुजानिया की कार्यप्रणाली चर्चा का केंद्र बन गई है।
- इससे पहले मुरैना में भी जहरीली शराब कांड के दौरान वे पुलिस अधीक्षक के पद पर थे, जहां 24 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
समग्र समाचार सेवा
सागर (मध्य प्रदेश), 8 सितंबर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ तहसील क्षेत्रों में नकली और जहरीली शराब के सेवन से हुई 22 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक हादसे के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच, इस पूरी त्रासदी को लेकर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) और आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया की भूमिका को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय नागरिकों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर कैसे पुलिस और आबकारी विभाग की नाक के नीचे इस तरह का अवैध और जहरीला कारोबार फल-फूल रहा था और समय रहते सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।
मुरैना शराब कांड से जुड़ी पुरानी यादें
आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया के कार्यकाल के दौरान इस तरह की यह पहली बड़ी घटना नहीं है। इससे पहले जब वे मुरैना जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे, तब भी वहां एक बहुत बड़ी जहरीली शराब त्रासदी हुई थी। उस दर्दनाक घटना में करीब 24 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जिसने उस समय पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। एक ही अधिकारी के कार्यकाल में दो अलग-अलग जिलों—मुरैना और अब सागर—में इस तरह की भीषण जहरीली शराब की घटनाएं सामने आने के बाद प्रशासनिक लापरवाही और खुफिया तंत्र की विफलता पर गंभीर बहस छिड़ गई है।
ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब के बड़े नेटवर्क
सागर जिले की ताजा घटना में ग्रामीणों और जांच एजेंसियों द्वारा यह बात सामने लाई गई है कि नौराज ग्राम पंचायत के ततरवारा गांव सहित कई सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से अवैध शराब बनाने और उसकी सप्लाई का काला कारोबार चल रहा था। स्थानीय स्तर पर इन गतिविधियों के संचालन के बावजूद पुलिस और प्रशासन द्वारा समय पर ठोस कार्रवाई न किया जाना कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। इस तरह के मामलों में जब तक स्थानीय स्तर पर मुखबिर तंत्र और पुलिस गश्त मजबूत नहीं होती, तब तक इस तरह के अवैध सिंडिकेट्स का पनपना जारी रहता है। हालांकि, मौजूदा घटना के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए ठेकेदार और मुख्य सप्लायरों समेत कई लोगों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारियां शुरू कर दी हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही और भविष्य की चुनौतियां
इस तरह की त्रासदियां न केवल प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम होती हैं, बल्कि यह पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर करती हैं। राज्य सरकार और विपक्ष दोनों ही इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इस प्रकार के जघन्य मामलों में केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों या तस्करों पर कार्रवाई करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि शीर्ष स्तर पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। फिलहाल, सागर में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है और अस्पतालों में पीड़ितों का इलाज जारी है, लेकिन इस पूरी घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।