समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 21 सितंबर :पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी एक बार फिर अपने बयान और अतीत की वजह से राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक, अंसारी के कथित “हिंदू कट्टरपंथ” पर सवाल उठाने और मिडिल ईस्ट में रॉ (RAW) अफसरों की पहचान उजागर करने जैसे पुराने आरोपों को लेकर तीखी आलोचना हो रही है। इस बीच, कांग्रेस के समर्थन के चलते बहस और गरमा गई है।
क्या है विवाद?
हामिद अंसारी ने जो पूर्व उपराष्ट्रपति हैं , दिल्ली में एक विश्व विद्यालय में हालिया बयान में नूरानी की किताब को कोट करते हुए हिन्दू को कट्टरपंथी बताया । विपक्षी दलों और खासतौर पर कांग्रेस ने उनके बयान का समर्थन किया है और उन्हें देश के लिए ईमानदार सेवक बताया।
आलोचना और आरोप
भाजपा और समर्थकों ने अंसारी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बार-बार ऐसे बयान दिए, जिनसे देश में धार्मिक तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा हुई। उन्हें ईरान में भारत के राजदूत रहते हुए रॉ के एजेंटों की पहचान उजागर करने जैसे गंभीर आरोपों का भी सामना करना पड़ा। ऐसा आरोप है कि उन्होंने ईरान के अपने कार्यकाल में भारत के सक्रिय खुफिया तंत्र के लोगों का अंत करवाया बहुतों की जानें गई ।
कांग्रेस की भूमिका
कांग्रेस पार्टी ने अंसारी का समर्थन करते हुए कहा कि वे हमेशा धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खड़े रहे हैं। कांग्रेसी पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा और उनके समर्थक देश की बहुलतावादी छवि को धूमिल करने के लिए बार-बार इस तरह के पुराने मुद्दों को उछालते हैं।
निष्कर्ष
हामिद अंसारी के बयान और कांग्रेस के समर्थन को लेकर उठी बहस ने एक बार फिर दिखा दिया है कि राजनीतिक विमर्श में हिंदुओं पर वैचारिक आघात बढ़ते जा रहे हैं ।