ऑटो चालक के बेटे ने पास की NEET परीक्षा, KGMU में मिला दाखिला
आर्थिक तंगी को मात देकर जौनपुर के मेधावी छात्र ने नीट यूजी 2026 में हासिल किए 627 अंक, लखनऊ के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी पढ़ाई।
- जौनपुर के एक साधारण ऑटो चालक के बेटे ने नीट यूजी 2026 परीक्षा में 720 में से 627 अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
- इस शानदार सफलता के दम पर उनका चयन उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में हो गया है।
- सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद इस छात्र ने कड़ी मेहनत और अटूट लगन के बल पर अपने डॉक्टर बनने के सपने को सच कर दिखाया है।
समग्र समाचार सेवा
जौनपुर, 25 सितंबर: कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और हौसले के आगे बड़ी से बड़ी बाधाएं भी घुटने टेक देती हैं, और इस बात को एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले युवा ने। नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) के हाल ही में आए परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि सपनों को पूरा करने का जज्बा हो, तो गरीबी या कम संसाधन कभी भी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकते। जौनपुर के एक ऑटो रिक्शा चालक के बेटे ने इस राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 720 में से 627 अंक प्राप्त किए हैं, जिसके बल पर उन्हें राज्य के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में शुमार किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ में एमबीबीएस (MBBS) पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश मिल गया है।
संघर्ष से भरा रहा है सफलता तक का यह सफर
इस मेधावी छात्र के लिए यह मुकाम हासिल करना बिल्कुल भी आसान नहीं था। उनके पिता दिन-रात ऑटो रिक्शा चलाकर किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करते थे और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद छात्र ने कभी अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। उसने स्कूली शिक्षा के साथ-साथ अपनी शुरुआती तैयारी स्थानीय स्तर पर ही की और बाद में अपनी लगन के दम पर स्कॉलरशिप और अन्य माध्यमों से आगे की कोचिंग पूरी की। कई बार ऐसा दौर भी आया जब संसाधनों की कमी खली, लेकिन माता-पिता के आशीर्वाद और खुद के आत्मविश्वास ने उसे कभी टूटने नहीं दिया।
KGMU में दाखिला मिलने से परिवार में खुशी की लहर
जब नीट परीक्षा के परिणाम आए और उसमें 627 अंकों के साथ KGMU जैसे शीर्ष मेडिकल कॉलेज में सीट मिलने की पुष्टि हुई, तो पूरे परिवार और इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे कि उनके संघर्षों का फल आखिरकार मिल ही गया। छात्र का कहना है कि उसका सपना एक कुशल डॉक्टर बनकर समाज के उन गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है, जो पैसे के अभाव में बेहतर इलाज नहीं करा पाते हैं। उसकी इस प्रेरणादायक सफलता पर आज पूरा जौनपुर जिला और उत्तर प्रदेश गर्व महसूस कर रहा है, और यह कहानी देश भर के उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है जो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं।