बनिया पूछते हैं कि महात्मा गांधी को गाली क्यों देते हैं ब्राह्मण – राजपूत ?
परशुराम, नेहरू, वाजपई और पृथ्वी राज चौहान को ब्राह्मण - राजपूत गलियाँ क्यों नहीं देते हैं ?
आचार्य श्रीहरि
यह प्रश्न मेरा नहीं है। यह प्रश्न बनियों का है, बनिया वर्ग के युवा प्रश्न करते हैं कि अगर महात्मा गांधी बनिया नहीं होते, ब्राह्मण या फिर राजपूत जाति में पैदा हुए होते तो फिर क्या उन्हें इसी तरह गलियाँ मिलती? महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें खूब गलियां दी जा रही है, आपमन जनक बातें कही जा रही है। परशुराम, नेहरू और वाजपई को ब्राह्मण क्यों नहीं गाली देते हैं? पृथ्वीराज चौहान और मान सिंह को राजपूत क्यों नहीं गाली देते हैं?
बनिया के युवा वर्ग कहते हैं कि परशुराम अपनी मां के हत्यारे थे, निर्दोष लोगों के हत्यारे थे, क्षत्रियों का समूल नाश कई बार किया था। कोई हत्यारा व्यक्ति भगवान कैसे हो सकता है? भारत विभाजन में गांधी के साथ ही साथ जवाहरलाल नेहरू भी जिम्मेदार थे पर ब्राह्मणों ने नेहरू को पंडित कहकर हमेशा सम्मान दिया, नेहरू से लेकर मुस्लिम की बेगम इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी तक ब्राह्मणों ने वोट देकर इन सबको राज सिहासन पर बैठाया। अटल बिहारी वाजपई मुस्लिम समर्थक थे, पाकिस्तान को कश्मीर देना चाहते थे, लालकृष्ण आडवाणी की वीरता नहीं जागी होती तो फिर वाजपई पाकिस्तान को कश्मीर दे देते। कारगिल के गुनहगार परवेज मुशर्रफ़ को वाजपई ने आगरा बुला कर चरण वंदना किया था। मांस मदिरा में डूबा हुआ वाजपई भारत सरकार को चलाने के लिए एक कांग्रेसी बृजेश मिश्रा को रख लिया था। बृजेश मिश्रा ही वाजपई को शराब कबाब उपलब्ध कराता था। नेपाल से अपहृत भारतीय विमान पर जालंधर में कमांडो करवाई को बृजेश मिश्रा ने रुकवाई थी, जिसकी अपमान जनक कीमत भारत की संप्रभुता ने चुकाई थी। एक पति को विदेश भागकर उसकी पत्नी को बिना शादी किए ही रखैल बना कर रख लिया था। उस रखैल का नाम राजकुमारी कौल था। पर ब्राह्मण वाजपई को पतित और वहशी, कबाबी कभी नहीं कहते हैं, आखिर क्यों?
पृथ्वीराज चौहान की मूर्खता के कारण भारत गुलाम हुआ। 16 बार मुहम्मद गोरी को उसने युद्ध में हराया था और हर बार माफ़ी दिया था। 17 हमले में चौहान की पराजय होती है और मुहम्मद गोरी उसका बर्बरता के साथ जबह कर देता है। राजपूत कभी भी चौहान को मूरख नहीं मानते हैं बल्कि उसकी जयंती मनाकर चरण वंदना करते हैं। मान सिंह का प्रकरण कितना विषैला है, यह भी सर्वविजित है। भामा शाह नहीं होते तो फिर महाराणा प्रताप को घास की रोटी खाने का भी अवसर नहीं मिलता। पर महाराणा प्रताप की जयंती पर महाराणा प्रताप के साथ भामा शाह की तस्वीर भी नहीं लगाते हैं।
बनियों की सोच यह भी है कि जब ब्राह्मण राजपूत अपनी जाति के विखंडन कारियों, देशद्रोहियों को गाली नहीं देते हैं बल्कि सम्मान करते हैं तो फिर हम बनिया गांधी का समर्थन क्यों नहीं करें? बनियों के इस तर्क को खारिज करना , सत्य का संहार करने जैसा है।
अब हमारा तर्क क्या है? हमारी सोच है कि बनिया वर्ग खासकर ब्राह्मणों का पालनहार है, ब्राह्मणों के मुख्य जीविका आधार मंदिरों और तीर्थ स्थलों की चमक धमक की रीढ़ बनिया ही होते हैं। राममंदिर में एक करोड़ से अधिक चंदा देने वाले 99 प्रतिशत बनिया है। राममंदिर आंदोलन बनियों के पैसे पर चला है। अगर सनातन की पीठ से बनियों ने हाथ खींच लिया तो फिर सनातन संहार कौन रोक सकता है?
मेरा मत है कि महत्ता गांधी को जरूर गलियां दीजिए पर ब्राह्मण अपनी जाति के परशुराम, पंडित नेहरू, पतित अटल बिहारी वाजपई और राजपूत अपनी जाति के पृथ्वीराज चौहान को भी गालिया देने का काम करें तो फिर इन पर जातिवाद का आरोप नहीं लगेगा। अगर ब्राह्मण और राजपूत ऐसा नहीं करते हैं तब बनिया भी महात्मा गांधी के समर्थन में क्यों नहीं उतरेंगे?
( मै महात्मा गांधी का समर्थन नहीं करता हूं पर बनियों की इस जागरूकता का समर्थन जरुर करता हूं )