दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर इतनी रही तीव्रता
उत्तराखंड के चमोली में आए 4.9 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के झटकों से कांपी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाके; जानें पूरी जानकारी।
- उत्तराखंड में केंद्र: राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड का चमोली जिला रहा, जहां रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.9 मापी गई।
- महसूस हुए झटके: इस शक्तिशाली भूकंप के झटके मंगलवार रात लगभग 10:23 बजे दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई अन्य हिस्सों में भी महसूस किए गए।
- गहराई और स्थिति: जमीन से मात्र 13 किलोमीटर की गहराई पर आए इस भूगर्भीय झटके के कारण लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई निवासी डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लोगों को मंगलवार देर रात एक बार फिर धरती हिलने का अहसास हुआ। रात के सन्नाटे में अचानक आए भूकंप के तेज झटकों के कारण लोगों में भारी दहशत फैल गई। लोग अपने घरों और बहुमंजिला इमारतों से बाहर निकलकर खुले में आ गए। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यह भूकंप केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि उत्तर भारत के एक बड़े भूभाग पर इसके झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने इस भूकम्प की पुष्टि करते हुए इसके केंद्र और तीव्रता से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं।
उत्तराखंड का चमोली रहा भूकंप का केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) से मिली जानकारी के मुताबिक, इस भूकंप का मुख्य केंद्र उत्तराखंड का चमोली जिला था। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई। यह भूकम्प मंगलवार रात लगभग 10 बजकर 23 मिनट और 13 सेकंड पर आया। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस भूकंप की गहराई जमीन से महज 13 किलोमीटर नीचे थी। कम गहराई पर होने के कारण इसके झटके काफी तेज महसूस किए गए और इसकी तरंगें दूर-दूर तक फैल गईं, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में धरती हिलती हुई महसूस की गई।
दिल्ली-एनसीआर में दहशत का माहौल
रात के वक्त अचानक आए इन झटकों ने लोगों को सतर्क कर दिया। हाई-राइज बिल्डिंग्स (ऊंची इमारतों) में रहने वाले लोगों ने हिलने का अहसास होने के बाद तुरंत सीढ़ियों का इस्तेमाल कर नीचे खुले मैदानों का रुख किया। सोशल मीडिया पर भी तुरंत लोगों ने अपने अनुभव साझा करना शुरू कर दिया, जिसमें नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में झटके महसूस किए जाने की बात कही गई। गनीमत यह रही कि इस मध्यम तीव्रता के भूकंप के कारण शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार किसी भी प्रकार के जानमाल के बड़े नुकसान या संपत्ति की क्षति की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।
क्यों बार-बार कांपता है उत्तर भारत और दिल्ली-एनसीआर?
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र भूगर्भीय रूप से बेहद संवेदनशील यानी ‘सिस्मिक जोन-IV’ (Seismic Zone IV) के अंतर्गत आता है। इसके अलावा, हिमालयी क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेटों के मिलने वाली जगह पर स्थित है, जिसके कारण इस बेल्ट में अक्सर भूगर्भीय हलचलें होती रहती हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य निरंतर भू-वैज्ञानिक परिवर्तनों के दौर से गुजरते हैं, और जब कभी इन क्षेत्रों में मध्यम या उच्च तीव्रता का भूकंप आता है, तो उसकी थरथराहट मैदानी इलाकों और दूरदराज के महानगरों जैसे दिल्ली तक आसानी से पहुंच जाती है।
भूकंप के दौरान बरती जाने वाली जरूरी सावधानियां
इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के वक्त विशेषज्ञों द्वारा हमेशा कुछ सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है:
घबराएं नहीं: भूकंप आने पर सबसे पहले संयम बनाए रखें और पैनिक न करें।
सुरक्षित स्थान चुनें: यदि आप घर के अंदर हैं, तो किसी मजबूत फर्नीचर (जैसे टेबल या पलंग) के नीचे छिप जाएं या दीवार के कोने में शरण लें।
लिफ्ट का इस्तेमाल न करें: बहुमंजिला इमारतों से बाहर निकलने के लिए कभी भी लिफ्ट का प्रयोग न करें, हमेशा सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करें।
खुले में रहें: यदि संभव हो तो तुरंत किसी खुले मैदान या पार्क में चले जाएं, जहां बिजली के खंभे, पेड़ों या इमारतों के गिरने का खतरा न हो।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और ऐसी आपात स्थिति में सुरक्षा के तय दिशा-निर्देशों का पालन करें।