ग्रेटर नोएडा में जाली नोट रैकेट का भंडाफोड़, इंस्टाग्राम रील्स से खुला राज

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में पुलिस ने इंस्टाग्राम पर रील बनाकर नकली नोट चलाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके पास से भारी मात्रा में जाली करेंसी बरामद हुई है।

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  • आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लग्जरी लाइफस्टाइल और नकली नोटों के बंडल की रील्स बनाकर युवाओं को आकर्षित करते थे और जालसाजी का खेल चलाते थे।
  • पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के पास से लाखों रुपये के जाली नोट, प्रिंटर, स्कैनर और अन्य उपकरण जब्त किए हैं।
  • पुलिस ने इस अवैध रैकेट में शामिल मुख्य सरगना समेत कई शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे गहन पूछताछ शुरू कर दी है।

समग्र समाचार सेवा
ग्रेटर नोएडा, 07 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर ग्रेटर नोएडा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में जाली नोट बनाने और चलाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय एवं अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह की कार्यशैली इतनी अनोखी और आधुनिक थी कि शातिर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इंस्टाग्राम’ का इस्तेमाल कर अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और नकली नोटों के बंडल की रील्स बनाकर युवाओं को प्रभावित करते थे और अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देते थे। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से अपराधियों के बीच हड़कंप मच गया है।

कैसे हुआ इस अवैध रैकेट का खुलासा?

गत कुछ दिनों से ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ संदिग्ध गतिविधियों और जाली नोटों के सर्कुलेशन की शिकायतें पुलिस को मिल रही थीं। साइबर सेल और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की टीमों ने जब इन संदिग्ध सोशल मीडिया प्रोफाइल्स और इंस्टाग्राम रील्स की मॉनिटरिंग शुरू की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरोपी इंस्टाग्राम पर महंगे कपड़े, गाड़ियां और नोटों की गड्डियों के साथ रील्स अपलोड करते थे, जिससे लोग उनकी तरफ आकर्षित होते थे और फिर वे इस जालसाजी के नेटवर्क में फंस जाते थे। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर इस गिरोह के ठिकानों पर अचानक छापेमारी की।

छापेमारी में भारी मात्रा में जाली करेंसी और उपकरण बरामद

पुलिस टीम द्वारा की गई इस छापेमारी में भारी मात्रा में छपे हुए जाली नोट, उच्च क्वालिटी के प्रिंटर, स्कैनर, विशेष कागज, स्याही और नोटों की गड्डियां बांधने वाली मशीनें बरामद की गईं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ये लोग बहुत ही सफाई से असली नोटों की हूबहू नकल तैयार करते थे, जिसे आम आदमी पहली नजर में पहचान नहीं पाता था।त्योहारों के सीजन और बाजार में पैसों की अधिक मांग के दौरान इस जाली करेंसी को बाजारों में खपाने की इनकी पूरी योजना थी, जिसे पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया।

आरोपियों से पूछताछ और पुलिस का बयान

गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पुलिस कस्टडी में पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है, जिसमें यह भी शामिल है कि इस रैकेट के तार अन्य राज्यों या किन-किन बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। ग्रेटर नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सोशल मीडिया का इस तरह से अपराध के लिए इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन रील्स के जरिए कितने लोगों को ठगा गया है और इस गिरोह के संपर्क में कौन-कौन लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे।

सोशल मीडिया पर बढ़ती निगरानी और जनता के लिए चेतावनी

इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर और पैनी कर दी है। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर रातों-रात अमीर बनने या आसान तरीकों से पैसे कमाने के लुभावने विज्ञापनों और रील्स के झांसे में न आएं। यदि किसी को भी इस तरह की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करे। पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं और साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है।

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