आखिर यह अभिजीत दीपके है कौन ?

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पूनम शर्मा

ऐसा तो नहीं है कि अभिजीत दीपक का कोई “डोजियर” भारत सरकार की खुफिया एजेंसी के हाथों में नहीं है। अवश्य होगा। फिर सरकार इस कॉकरोच लफंगे को देश में अराजकता पैदा करने से क्यों नहीं रोक रही है? अब जर्मनी से आने के बाद ध्रुव राठी ने भी भौंकना शुरू कर दिया है। आखिर सरकार और कितना समझौता करेगी?

CJP का निर्माण अभिजी त दीपक के बेडरूम से नहीं हुआ है।

ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (Human Rights Foundation) कॉकरोच पार्टी के पीछे काम करने वाली शक्ति है। आज का यह पूरा खेल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित ओस्लो फ्रीडम फोरम (Oslo Freedom Forum) में तैयार किया गया था। और अंदाजा लगाइए कि भारत से कितने प्रतिभागी ओस्लो फ्रीडम फोरम में गए थे? भारत से दो लोग गए थे। एक सौरभ दास और दूसरी पत्रकार सुप्रिया शर्मा।

फोरम के प्रमुख वक्ताओं में से एक हेलेन स्वानसन थीं—वही पत्रकार, जिन्होंने मोदीजी की ओस्लो यात्रा (18 से 20 मई 2026) के दौरान अपमानजनक सवाल पूछा था।

भारत में अस्थिर स्थिति पैदा करने की पटकथा बहुत पहले ही लिखी जा चुकी थी। और इस पूरे इकोसिस्टम को सौरभ दास और ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन के माध्यम से भारत में लाया गया है। ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने कॉकरोच पार्टी के सौरभ दास को एक पुस्तक लिखने के लिए शुरुआती फंडिंग दी थी।

ठीक उसी प्रकार, जैसे न्यूट गिंगरिच ने किया था, जब उन्होंने अमेरिका में ‘फॉक्स न्यूज’ लाने का प्रयास किया था। सौरभ दास के मामले में भी वही तरीका अपनाया गया है।

यह सब बहुत पहले ही तय कर लिया गया था। दीपक ने अमेरिका में ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन और जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन के माध्यम से पूरे एक वर्ष तक प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

बोस्टन विश्वविद्यालय में उसके दूसरे वर्ष का कोई रिकॉर्ड नहीं है। अब एक बहुत बड़े अनुदान की बात कही जा रही है, जिसके माध्यम से अभिजीत दीपक की डिग्री की पुष्टि की जा सकती है।

पत्रकार सुप्रिया शर्मा ओस्लो फ्रीडम फोरम की दूसरी प्रमुख वक्ता थीं।

और उन्होंने उमर खालिद के बारे में खुलकर कहा कि किस प्रकार भारत में दूसरे धर्मों के लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है और हिंदू हिटलर तथा मुसोलिनी जैसे हैं।

ये सुप्रिया शर्मा के विचार और दृष्टिकोण थे, जिनके अनुसार मोदी एक तानाशाह हैं। सुप्रिया शर्मा ने ‘लव जिहाद’ पर एक पुस्तक लिखी है और उनका कहना है कि लव जिहाद एक काल्पनिक कहानी है।

इस प्रकार के आंदोलन पूरी दुनिया में वामपंथी विचारधारा के साथ शुरू हो रहे हैं, जिनमें विद्यार्थियों का ब्रेनवॉश करके आंदोलन खड़े किए जा रहे हैं।

यह नेपाल में हो रहा है, बांग्लादेश में हो रहा है, फ्रांस में चल रहा है। क्यूबा में यह बहुत पहले हो चुका था। यही लक्ष्य है… भारत में गृहयुद्ध कराना। भारत के टुकड़े-टुकड़े करना। ये वोट चोरी… ज्ञानेश कुमार… SIR तो केवल बहाने हैं। वास्तविक उद्देश्य भारत की सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करना है।

यदि मोदी सरकार सख्ती नहीं बरतती है, तो भारत का भविष्य अनिश्चित है। सरकार की नीति सही नहीं लग रही है। दिन-प्रतिदिन स्थिति बिगड़ती जा रही है।

ध्रुव राठी की भारत में मौजूदगी इसका नवीनतम अशुभ संकेत है। किसी भी प्रकार से समाप्त करना इन नकारात्मक शक्तियों को बहुत आवश्यक हो गया है ।

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