धार्मिक पर्यटन को सुरक्षित करने की जरुरत

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राकेश अचल
बंगाल और मप्र में शारदेय नवरात्री की सप्तमी कालरात्रि बनकर सामने आई।बंगाल और मप्र में हुए दो हादसों में तीन दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं की जान चली गई।लेकिन ये हादसे भी राजनीति के काम आ रहे हैं।दोनो सूबों में हादसा पर्यटन शुरु हो गया है।नेता घडियाल बनकर आंसू बहा रहे हैं।

देश में धार्मिक स्थलों पर हादसे कोई आज ही शुरू नहीं हुए।पहले हादसों की आशंका के कारण ही चार धाम यात्रा पर जाने वाले लोग घरवालों को अंतिम प्रणाम करके ही घर से निकलते थे।लेकिन आज चारधाम तो छोडिए आपके शहर-गांव के मंदिर और अस्थाई धार्मिक पंडाल ही हादसों का केंद्र बन गए है।न भीड सुरक्षित है न सडक और मंडप।

बंगाल में 19 से ज्यादा लोग पंडाल ढहने से मरे जबकि मप्र में एक ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचल मारा।मप्र के हादसे पर दिल्ली मौन रही लेकिन बंगाल के हादसे से प्रधानमंत्री,गृहमंत्री और राहुल गांधी तकके आंसू निकल पडे।राहतों,मुआवजों की बरसात शुरू हो गई।नेता की फौज घायलों की खैर खबर लेने अस्पतालों में हाजरी देने लगे।

देश में दिल्ली और सूबों की सरकारें नये उद्योग- धंधे लगाने के बजाय धार्मिक पर्यटन पर जोर दे रही है।बनारस और उज्जैन ही नहीं अपितु हर शहर में धार्मिक कोरीडोर बनाए जा रहे हैं।करोडो का बजट है मंदिरो के लिए लेकिन न किसी गुरुद्वारे को विकसित किया गया न किसी मस्जिद या चर्च को।सारा ध्यान हिन्दू मंदिरों पर।ठीक भी है मंदिरो में जितने हादसे होते हैं उतने किसी चर्च,गुरुद्वारा और मस्जिद में नही होते।(मक्का-मदीना छोडकर)।
सवाल ये है कि जब सरकार धार्मिक पर्यटन से ही अपनी अर्थव्यवस्था चलाना चाहती है तो उसे इन धर्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए ठीक वैसी ही पृथक फोर्स भी बनाना चाहिए जैसा कि उद्योगों,सीमाओं और जंगलों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।बीएसएफ,सीआरपीएफ,आदि।

लेकिन सरकार हर काम आधा अधूरा करती है।धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्र तै बना दिया लेकिन सुरक्षा निजी हाथों में सौंप दी।निजी सुरक्षा गार्ड पैसे लेकर सेवाएं देते हैं इसीलिए अधिकांश धार्मिक स्थल,मेले स्थानीय पुलिस के भरोसे रहते हैं।और पुलिस

भूखी-नंगी होती ही है।चाहे बंगाल की पुलिस हो या मप्र की।मप्र के ग्वालियर शहर के हादसे के बाद मोहन सरकार उतना भी नही कर सकी,जितना कि बंगाल सरकार ने किया।न यहाँ कोई हेल्पलाइन बनाई गई और न कोई मंत्री अस्पताल में डेरा डालकर बैठा।कोलकाता में तो खुद मुख्यमंत्री ने ये काम किया।खबर है कि दुर्गा पूजा के मौके पर पश्चिम बंगाल में हुए हादसे में पीड़ितों से मिलने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जाएंगे। गृह मंत्री अमित शाह शनिवार की शाम से ही कोलकाता में हैं।

मप्र के ग्वालियर में तो प्रधानमंत्री मोदी के दामाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अस्पताल गए तो उस अस्पताल प्रशासन ने सिंधिया के स्वागत में ग्रीन कारपेट बिछा दिया जिसके पास पलंगों और स्ट्रेचरों की मरम्मत और टीप-टर्र के भी पैसे नहीं हैं।मुख्यमंत्री को तो फुर्सत है ही नहीं।

दोनों ही हादसों में सुरक्षा खोट रही।कोलकाता में पंडाल की सुरक्षा नही सुनिश्चित की गई तो मप्र में पुलिस ने 500₹ के लालच में नो एंट्री वाली सडक ट्रक के लिए खोल दी।दोनों हादसों में दोषियों का कुछ नही होना।निलंबन का नाटक यहाँ भी हुआ,वहाँ भी होगा।लेकिन जो मर गए उनके परिजनो का जीवन तो चार-छह लाख के मुवजे से कटनने से रहा।

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