यूपी चुनाव: गठबंधन में मुस्लिमों के लिए 100 सीटों की मांग
कांग्रेस नेता हसीब खान ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने रखी बड़ी शर्त, कहा- हिस्सेदारी में 100 सीटों से कम मंजूर नहीं।
- कांग्रेस नेता हसीब खान ने मुस्लिमों के लिए 100 सीटें मांगीं।
- सपा के साथ सीट शेयरिंग को लेकर गठबंधन में तेज हुई चर्चा।
- मुस्लिम बहुल सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने की मांग।
समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 22 अक्तूबर: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन, विशेष तौर पर समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे (Seat Sharing) को लेकर चर्चाओं और दावों का दौर शुरू हो चुका है। इस बीच, कांग्रेस पार्टी के भीतर से ही एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष हसीब खान ने खुलकर मांग की है कि आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ होने वाले गठबंधन के तहत मुस्लिम समुदाय के लिए कम से कम 100 सीटें तय की जानी चाहिए।
हिस्सेदारी की बात हो तो 100 सीटों से नीचे समझौता नहीं
कांग्रेस नेता हसीब खान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि राजनीतिक भागीदारी और हिस्सेदारी की बात की जाती है, तो गठबंधन में 100 सीटों से कम पर कोई बात नहीं हो सकती। उनका तर्क है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या और उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी बेहद निर्णायक भूमिका निभाती है। इसलिए, जब सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला तैयार किया जाए, तो उसमें मुस्लिम आबादी के अनुपात को ध्यान में रखते हुए 100 सीटें कांग्रेस या गठबंधन के कोटे से मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में दी जानी चाहिए।
हसीब खान ने यह भी कहा कि वे समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर कांग्रेस में इसीलिए आए हैं क्योंकि कांग्रेस पार्टी में सभी वर्गों और विशेषकर अल्पसंख्यकों को उचित सम्मान और अधिकार दिया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम समाज केवल वोट देने के लिए नहीं है, बल्कि सत्ता और टिकट वितरण में उसकी वास्तविक भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
मुस्लिम बहुल सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर रणनीति
कांग्रेस नेता की इस मांग के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग के फार्मूले पर दबाव बढ़ सकता है। हसीब खान का कहना है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बहुसंख्यक या निर्णायक स्थिति में है, उन सभी सीटों पर मजबूत और जिताऊ मुस्लिम उम्मीदवारों को ही चुनाव मैदान में उतारा जाना चाहिए। पार्टी के भीतर उठी इस मांग से अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी चुनावों में टिकट बंटवारे के दौरान क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए दोनों दलों को खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन और सियासी समीकरण
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन पिछले चुनावों से ही काफी चर्चा में रहा है। एक तरफ जहां दोनों दल मिलकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कड़ी टक्कर देने की रणनीति बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सीटों के तालमेल को लेकर अंदरखाने विभिन्न नेताओं द्वारा अपने-अपने समीकरण रखे जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अल्पसंख्यक वोटों को पूरी तरह अपने पाले में बनाए रखने के लिए इस तरह की मांगें उठना स्वाभाविक हैं, लेकिन इससे सीट बंटवारे की बातचीत में पेच भी फंस सकता है।
दूसरी ओर, इस राजनीतिक माहौल के बीच अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि विपक्ष केवल तुष्टीकरण की राजनीति कर रहा है और जनता विकास के मुद्दों पर वोट देगी। बहरहाल, कांग्रेस नेता द्वारा उठाई गई 100 सीटों की इस मांग ने महासंग्राम से पहले राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है।
निष्कर्ष और आगामी राजनीतिक हलचल
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों की तैयारियां अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में सीट शेयरिंग और समुदाय विशेष के प्रतिनिधित्व को लेकर आने वाले दिनों में और भी कई बड़े बयान सामने आने की उम्मीद है। कांग्रेस नेता हसीब खान की यह मांग आने वाले समय में सपा-कांग्रेस गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे के समझौते का एक अहम और चर्चा का विषय बनी रहेगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।