सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का पक्ष, SIR पर हुआ फैसला
उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया— एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े सभी निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए थे।
- चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर प्रक्रिया का किया बचाव।
- आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
- मतदाता सूची प्रक्रिया में कोई अवैध बदलाव नहीं किया गया।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27 अक्तूबर: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने विशेष मतदाता पुनरीक्षण और संबंधित (SIR) प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में देश के उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए अपने विस्तृत जवाबी हलफनामे (Counter Affidavit) में चुनाव आयोग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि एसआईआर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय आयोग के सदस्यों द्वारा पूरी तरह से सर्वसम्मति के साथ लिए गए थे। आयोग ने यह भी साफ किया कि इस पूरी प्रक्रिया में संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह से पालन किया गया है और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की स्थापित प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का अवैध बदलाव नहीं किया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की पूर्ण सहमति
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में जानकारी दी है कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए एसआईआर से संबंधित सभी आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और दोनों चुनाव आयुक्तों सहित आयोग के तीनों सदस्यों की सामूहिक और पूर्ण सहमति से पारित किए गए थे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक फाइलों पर विचार-विमर्श के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा दी गई शुरुआती टिप्पणियों, सवालों या व्यक्तिगत सुझावों को आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता है। फाइलें तय प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत एक आयुक्त से दूसरे और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास डिजिटल माध्यम से गुजरती हैं, जिसके बाद ही अंतिम निर्णय को रिकॉर्ड किया जाता है।
निर्णय लेने की प्रशासनिक और वैधानिक प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि यदि कोई अधिकारी अपने निर्धारित अधिकारों से परे जाकर कोई आदेश जारी करता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाती है। उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया गया कि 28 जुलाई का कार्य आवंटन आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव द्वारा जारी किया गया था, जिस पर अगले ही दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई थी। इसके बाद 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देशों के तहत उस आदेश को प्रभावी नहीं होने दिया गया।
आयोग ने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की आंतरिक प्रक्रियाएं यह दर्शाती हैं कि संस्था में पारदर्शी और नियमानुसार नियंत्रण प्रणाली पूरी तरह से सक्रिय है।
एसआईआर प्रक्रिया का पूर्ण बचाव और याचिकाओं को खारिज करने की मांग
विपक्ष और विभिन्न याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया का पुरजोर बचाव किया है। आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 या अन्य वैधानिक दस्तावेजों में कोई भी मनमाना बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही, ईसीआई-नेट (ECI-Net) में किसी भी प्रकार के अनधिकृत बदलाव या छेड़छाड़ के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया है।
चुनाव आयोग ने अदालत से आग्रह किया है कि इन आधारहीन याचिकाओं को खारिज किया जाए, क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया देश के निष्पक्ष लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है।
निष्कर्ष
उच्चतम न्यायालय में चुनाव आयोग द्वारा दाखिल यह हलफनामा चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संस्थागत स्वायत्तता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अदालत इस मामले में आगे भी सुनवाई जारी रखेगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि देश में चुनावी डेटा और मतदाता सूचियों के प्रबंधन की दिशा में आगे की कानूनी और प्रशासनिक रूपरेखा क्या होगी।