ममता बनर्जी से मिले CJP संस्थापक अभिजीत दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी से की मुलाकात, इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर स्पष्ट की स्थिति।
- अभिजीत दीपके ने दिल्ली में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की।
- CJP ने इंडिया गठबंधन की रैली के एजेंडे को समर्थन दिया लेकिन दूरी बनाई।
- ममता बनर्जी ने युवा कार्यकर्ताओं के संघर्ष और आंदोलन की सराहना की।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 31 अक्तूबर: देश की राजधानी नई दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी उस वक्त और तेज हो गई जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और युवा नेता अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन (INDIA Bloc) द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली में एक बड़ी रैली का आयोजन किया जा रहा है।
इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच देश के वर्तमान राजनीतिक हालातों, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और युवाओं के नेतृत्व में चल रहे आंदोलनों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। अभिजीत दीपके ने विशेष तौर पर मुश्किल समय में युवा कार्यकर्ताओं और CJP के समर्थन में खड़े होने के लिए ममता बनर्जी के प्रति आभार व्यक्त किया।
‘सिर्फ दीदी को धन्यवाद देने आया था’: अभिजीत दीपके
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उन्होंने और उनकी पार्टी ने भले ही इस विरोध प्रदर्शन के वैचारिक और राजनीतिक उद्देश्यों को अपना पूर्ण समर्थन दिया हो, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक स्वतंत्र और तटस्थ मंच के रूप में काम करती रहेगी। उन्होंने कहा, “मैं केवल ‘दीदी’ को धन्यवाद देने आया था। जब NEET पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर हमारा पहला विरोध प्रदर्शन हुआ था और जब हमारे साथियों सौरभ दास तथा आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था, तब ममता बनर्जी ने मजबूती से हमारा साथ दिया था।”
दीपक ने आगे कहा कि CJP देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए संघर्ष कर रहे हर उस संगठन का समर्थन करती है जो ‘वोट चोरी’ या चुनावी धांधलियों के खिलाफ आवाज उठाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि कॉकरोच जनता पार्टी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखेगी और औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन के रविवार के प्रदर्शन मंच पर सीधे तौर पर शामिल नहीं होगी, बल्कि एक स्वतंत्र संस्था के रूप में अपना वैचारिक समर्थन जारी रखेगी।
ममता बनर्जी ने युवा कार्यकर्ताओं के संघर्ष को सराहा
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अभिजीत दीपके और अन्य युवा कार्यकर्ताओं की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जो आवाज उठाई है, वह सराहनीय है। ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि ये युवा इस आंदोलन के अग्रदूत और संस्थापक हैं। इन्हें वह सम्मान मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं।”
साथ ही, ममता बनर्जी ने अभिजीत दीपके और उनके युवा साथियों को पश्चिम बंगाल आकर वहां भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का खुला निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति, किसानों, महिलाओं और छात्रों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए। याद रहे कि पिछले दिनों दिल्ली पुलिस द्वारा अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए ममता बनर्जी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया था।
चुनावी सुधार और SIR को लेकर बढ़ता राजनीतिक तनाव
यह पूरी राजनीतिक गतिविधि ऐसे समय में हो रही है जब देश भर में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विपक्ष और विभिन्न युवा संगठनों का आरोप है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के जरिए नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों में बाधा डालने की कोशिश की जा रही है।
अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी लगातार यह मांग करती रही है कि चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि CJP ने अपनी राजनीतिक तटस्थता और स्वतंत्र वजूद को बनाए रखने का निर्णय लिया है, लेकिन क्षेत्रीय दलों और युवा संगठनों के बीच इस तरह की मेल-मुलाकातें आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी रणनीतियों पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।
निष्कर्ष
अभिजीत दीपके और ममता बनर्जी की यह मुलाकात इस बात का प्रतीक है कि देश के युवा नेतृत्व और अनुभवी विपक्षी नेताओं के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को लेकर वैचारिक तालमेल बढ़ रहा है। भले ही CJP ने सांगठनिक रूप से गठबंधन की रैलियों से दूरी बनाए रखने की बात कही हो, लेकिन चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर उनकी यह गोलबंदी राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गई है।