पूनम शर्मा
अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में ओहायो से भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी की पराजय केवल एक राज्य का चुनावी परिणाम नहीं है। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घटती लोकप्रियता और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बदलते राजनीतिक रुझानों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है। ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के समर्थन के बावजूद डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने रिपब्लिकन पार्टी के दो दशक पुराने गवर्नर पद के प्रभुत्व को समाप्त कर दिया।
इस परिणाम से दो प्रश्न उभरते हैं। क्या ट्रंप की राजनीतिक अपील कमजोर पड़ रही है? और क्या रिपब्लिकन पार्टी की ओर आकर्षित हुए भारतीय मूल के हिंदू मतदाता उससे दूरी बनाने लगे हैं?
ओहायो का परिणाम: ट्रंप के लिए चेतावनी?
ओहायो लंबे समय से रिपब्लिकन राजनीति का मजबूत केंद्र रहा है। वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने यहां लगभग 11 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीत हासिल की थी।
लेकिन अक्टूबर 2026 के मैरिस्ट सर्वेक्षण में राज्य के संभावित मतदाताओं के बीच ट्रंप की कार्यप्रणाली को केवल 43 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि 55 प्रतिशत ने असहमति व्यक्त की।
इसी सर्वेक्षण में 40 प्रतिशत संभावित मतदाताओं ने कहा कि प्रतिनिधि सभा के लिए उनका वोट मुख्यतः ट्रंप के विरोध से प्रेरित होगा, जबकि 21 प्रतिशत ने ट्रंप के समर्थन को प्रमुख कारण बताया।
ये आंकड़े ओहायो में राष्ट्रपति के प्रति असंतोष का संकेत देते हैं। हालांकि, गवर्नर चुनाव में रामास्वामी की हार को केवल ट्रंप विरोध का परिणाम मानना भी उचित नहीं होगा।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय में बदलता राजनीतिक रुझान
कार्नेगी एंडोमेंट के 2026 के सर्वेक्षण में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया।वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के बीच ट्रंप का समर्थन लगभग 30 प्रतिशत था। 2026 की शुरुआत में किए गए सर्वेक्षण में काल्पनिक पुनर्मतदान की स्थिति में यह घटकर 25 प्रतिशत रह गया। विशेष रूप से 18 से 39 वर्ष के भारतीय-अमेरिकी पुरुषों में ट्रंप का समर्थन 2024 के 40 प्रतिशत से घटकर 2026 में 24 प्रतिशत दर्ज किया गया।
यह बदलाव उल्लेखनीय है, क्योंकि 2024 में युवा भारतीय-अमेरिकी पुरुषों का रिपब्लिकन पार्टी की ओर झुकाव एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रवृत्ति माना गया था।
हालांकि, ये आंकड़े पूरे भारतीय-अमेरिकी समुदाय से संबंधित हैं, केवल हिंदू मतदाताओं से नहीं। इसलिए इन्हें हिंदू समर्थन में समान अनुपात की गिरावट का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
हिंदू पहचान के बावजूद रामास्वामी को समर्थन क्यों नहीं मिला?
विवेक रामास्वामी ने अपनी हिंदू धार्मिक पहचान को सार्वजनिक जीवन में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है। वह भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों का उल्लेख भी करते रहे हैं।
इसके बावजूद ओहायो में उनकी हार एक महत्वपूर्ण राजनीतिक वास्तविकता को सामने लाती है—धार्मिक पहचान और चुनावी समर्थन हमेशा एक-दूसरे के समानांतर नहीं चलते।
अमेरिका में हिंदू समुदाय की राजनीतिक प्राथमिकताएं विविध हैं। कई मतदाता आर्थिक नीतियों, आव्रजन व्यवस्था, सामाजिक स्वतंत्रता, स्वास्थ्य सेवाओं और अल्पसंख्यक अधिकारों के आधार पर अपना राजनीतिक निर्णय लेते हैं।
इसलिए रामास्वामी की हार हिंदू पहचान की अस्वीकृति नहीं, बल्कि पहचान आधारित चुनावी अपेक्षाओं की सीमाओं का उदाहरण भी हो सकती है।
रिपब्लिकन पार्टी के भीतर अल्पसंख्यकों को लेकर असहजता
भारतीय-अमेरिकी समुदाय में रिपब्लिकन पार्टी के प्रति असंतोष का एक कारण अल्पसंख्यकों के प्रति उसके कुछ नेताओं और समर्थक समूहों का रवैया भी बताया गया है।
कार्नेगी के सर्वेक्षण में रिपब्लिकन पार्टी से स्वयं को अलग रखने वाले उत्तरदाताओं में 27 प्रतिशत ने अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णुता को एक प्रमुख कारण बताया। यह अनुपात 2024 की तुलना में दस प्रतिशत अंक अधिक था।
कुछ उत्तरदाताओं ने पार्टी पर ईसाई इवेंजेलिकल विचारधारा के अत्यधिक प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
रामास्वामी जैसे हिंदू नेता के लिए यह एक जटिल राजनीतिक परिस्थिति है। उन्हें एक ओर रिपब्लिकन मतदाताओं का समर्थन प्राप्त करना होता है, तो दूसरी ओर उन धार्मिक और सांस्कृतिक पूर्वाग्रहों का भी सामना करना पड़ सकता है जो पार्टी के कुछ वर्गों में मौजूद हैं।
लेकिन इस समस्या को संपूर्ण रिपब्लिकन पार्टी या उसके सभी मतदाताओं की सोच मान लेना उचित नहीं होगा।
महंगाई और आर्थिक चिंताएं बनीं बड़ी चुनौती
ओहायो के अक्टूबर सर्वेक्षण में 44 प्रतिशत संभावित मतदाताओं ने कहा कि पिछले एक वर्ष में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हुई है। भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के बीच भी महंगाई, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाएं प्रमुख चिंताओं के रूप में सामने आई हैं।
कार्नेगी सर्वेक्षण के अनुसार, 21 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने महंगाई और कीमतों को सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तिगत मुद्दा बताया, जबकि 17 प्रतिशत ने रोजगार और अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दी। यह दर्शाता है कि सांस्कृतिक पहचान महत्वपूर्ण होने के बावजूद आर्थिक असुरक्षा राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करती है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर असंतोष
भारतीय-अमेरिकी समुदाय में ट्रंप प्रशासन की भारत संबंधी नीतियों को लेकर भी असंतोष दर्ज किया गया है। कार्नेगी के फरवरी 2026 के अध्ययन के अनुसार, केवल 20 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ट्रंप के भारत-अमेरिका संबंधों के प्रबंधन का समर्थन किया, जबकि 55 प्रतिशत ने असहमति जताई।
व्यापार, आव्रजन और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विवाद इस असंतोष की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण रहे हैं। हालांकि, इसी अध्ययन में भारत-अमेरिका संबंधों को अपनी सबसे बड़ी व्यक्तिगत राजनीतिक प्राथमिकता बताने वालों की संख्या बहुत कम थी। इससे स्पष्ट होता है कि विदेश नीति को लेकर नाराजगी और मतदान का वास्तविक निर्णय अलग-अलग हो सकते हैं।
क्या ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट स्थायी है?
ओहायो का परिणाम और उपलब्ध सर्वेक्षण ट्रंप की लोकप्रियता में कमजोरी के संकेत देते हैं, लेकिन किसी स्थायी राजनीतिक बदलाव की घोषणा करना अभी जल्दबाजी होगी। भारतीय-अमेरिकी समुदाय में डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन अब भी व्यापक है, लेकिन उसके प्रति उत्साह में भी कमी दर्ज की गई है। स्वतंत्र मतदाताओं की संख्या बढ़ना इस परिवर्तन का एक अन्य पहलू है।
इसलिए वर्तमान स्थिति को केवल रिपब्लिकन पार्टी से डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर सीधा पलायन कहना भी अधूरा विश्लेषण होगा।
निष्कर्ष: हिंदू आधार का क्षरण या ट्रंप की राजनीतिक अपील में कमी?
विवेक रामास्वामी की हार तीन महत्वपूर्ण प्रवृत्तियों की ओर ध्यान आकर्षित करती है—ओहायो में ट्रंप के प्रति असंतोष, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक हिस्से में रिपब्लिकन समर्थन की कमजोरी और धार्मिक पहचान के आधार पर चुनावी समर्थन सुनिश्चित करने की सीमाएं।
अमेरिकी राजनीति का यह घटनाक्रम बताता है कि प्रवासी समुदायों की राजनीतिक पहचान स्थिर नहीं होती। उनके निर्णय आर्थिक परिस्थितियों, सार्वजनिक नीतियों, सामाजिक स्वीकार्यता और नेतृत्व के प्रदर्शन से प्रभावित होते हैं।
ओहायो का संदेश किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है। यह उस बदलती अमेरिकी राजनीति की तस्वीर है जिसमें राष्ट्रीय नेतृत्व की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की अपेक्षाएं लगातार नए समीकरण बना रही हैं।