समग्र समाचार सेवा
श्रीनगर, 4 मार्च। घाटी की सबसे पुरानी और एतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार को लगभग 31 सप्ताह बाद नमाज अदा हुई। इस दौरान जामिया मस्जिद के आस-पास के क्षेत्र में सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त रहा। अलबत्ता, आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाईज मौलवी उमर फारुक नमाज ए जुम्मा के लिए जामिया मस्जिद में नहीं पहुंच पाए। वह कथित तौर पर घर में नजरबंद रखे गए हैं।
यह मस्जिद 700 साल पुरानी
ग्रीष्मकालीन राजधानी में डाउन-टाउन के नौहट्टा स्थित जामिया मस्जिद करीब 700 साल पुरानी है। आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी उमर फारुक इसी मस्जिद में पांच अगस्त 2019 से पूर्व हर शुक्रवार को नमाज-ए-जुम्मा से पूर्व अपने खुतबे में अपने कश्मीर विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाते थे। नौहट्टा और उसके साथ सटे इलाके को अलगाववादियों का मजबूत गढ़ माना जाता है।
राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लगते आ रहे हैं आरोप
जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को लागू किए जाने से पूर्व प्रत्येक शुक्रवार को इसी मस्जिद के बाहर राष्ट्रविरोधी हिंसक प्रदर्शन और पाकिस्तान समर्थक नारेबाजी खूब होती थी। आतंकियों के पोस्टर और पाकिस्तानी ध्वज लहराया जाना भी सामान्य बात मानी जाती थी।
2019 में मस्जिद को अहतियातन कर दिया गया था बंद
जामिया मस्जिद को पांच अगस्त 2019 के बाद वादी में पैदा हुए हालात के मद्देनजर एहतियात के तौर पर कुछ समय बंद रखा गया था और दिसंबर 2020 में जामिया मस्जिद में नमाज सामान्य रुप से अदा होने लगी थी। इसके बाद 2020 में कोविड से पैदा हालात के मददेनजर भी इसे कुछ समय बंद रखा गया था। उसके बाद इस वर्ष की शुरुआत में भी इसे कोरोना संक्रमण के मददेनजर कुछ समय के लिए बंद रखा गया था।
कोरोना के जाने के बाद मस्जिद को खोलने का हुआ फैसला
वादी में हालात के सामान्य होने और कोविड का प्रकोप घटने का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने तीन दिन पहले जामिया मस्जिद को नमाज ए जुम्मा व सामान्य दिनों की नमाज के लिए पूरी तरह खोलने का फैसला किया था। आज जामिया मस्जिद आम श्रद्धालुओं के लिए खुल गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नमाज ए जुम्मा के लिए मस्जिद में जमा हुए। नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। नमाज के दौरान मस्जिद के भीतर या बाहर किसी भी तरह से राष्ट्रविरोधी तत्वों को माहौल बिगाड़ने का अवसर न मिले,इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम रखे थे।