समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10अक्टूबर। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य पंचांग में मुहूर्त देखने के बाद ही किया जाता है. खास तौर पर शादी-विवाह, मुंडन व गृह प्रवेश आदि ये सभी कार्य करने के लिए लोग कार्तिक माह का इंतजार करते हैं. जो कि चातुर्मास का अंतिम महीना होता और इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना भी कहा जाता है. कहते हैं कार्तिक माह में पवित्र नदियों में स्नान करना और दान-पुण्य करना बेहद ही फलदायी होता है. इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. लेकिन कार्तिक माह के कुछ नियम भी होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है. आइए जानते हैं कार्तिक माह का महत्व और इसके नियम.
स्कंद पुराण में कार्तिक मास को सर्वश्रेष्ठ माना गया है और कहा जाता है कि यह भगवान विष्णु का प्रिय महीना है. इसलिए इस महीने में मांगलिक कार्य किए जाते हैं और मान्यता है कि इस माह देव तत्व मजबूत होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार 10 अक्टूबर 2022 से कार्तिक मास की शुरुआत हो गई है और यह 8 नवंबर 2022 को समाप्त होगा.
कार्तिक स्नान है बेहद महत्वपूर्ण
हिंदू धर्म में कार्तिक स्नान को काफी महत्वपूर्ण माना गया है और कहते हैं इस पूरे माह पवित्र नदियों में स्नान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. यदि पवित्र नदी में स्नान करना संभव नहीं है तो घर में नहाने के पानी में कुछ बूंदे गंगाजल की मिलानी चाहिए. ध्यान रखें कि अगर आप कार्तिक स्नान कर रहे हैं तो पूरे महीने सूर्योदय से पहले ही स्नान कर लेना चाहिए. फिर इसके बाद पूजा-पाठ करना चाहिए.
कार्तिक महीने के नियम
कार्तिक माह जितना महत्वपूर्ण है, उतने ही महत्वपूर्ण इसके नियम है. धार्मिक व सामाजिक मान्ताओं के अनुसार इस महीने स्निग्ध चीजें और मेवे खाने की सलाह दी जाती है. कहा जाता है कि उन चीजों का सेवन करना चाहिए जिनका स्वभाव गर्म होता है. कार्तिक माह में दाल खाने की मनाही होती है. साथ ही दोपहर को भी नहीं सोना चाहिए.