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अकेलापन कविता

जीवन रेखा

जीवन रेखा आपका हाथ सर पर था तो दिल में एक सुकून सा था। सब कुछ कर देने का एक जनून सा था। पता था — कुछ गलत भी हो जाए, तो आप संभाल लेंगे। अब एक अजीब सा अकेलापन है, मानो शरीर से आत्मा निकल गई हो। एक अबोध शरीर चल पड़ा है आपके दिखाए…
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