धारण करना ही धर्म है, जो सनातन का सार है !
प्रस्तुति -कुमार राकेश
एक राजा ने घोषणा की कि जो धर्म श्रेष्ठ होगा,
मैं उसे स्वीकार करूँगा और आगे बढ़ाने में मदद दूँगा.
अब तो उसके पास अपने धर्म की श्रेष्ठता का गुण गाते
एकसेएक विद्वान् आने लगे, जो दूसरे धर्मों का दोष गिनाते
और…
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