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भारतीय इतिहास

आजादी के 14 साल बाद भारत में शामिल हुआ था गोवा

गोवा 1510 से पुर्तगाल के अधीन था और 1961 में भारत में शामिल हुआ। आजादी के बाद नेहरू सरकार ने पहले कूटनीतिक रास्ता अपनाया। 1961 में ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन चटनी के जरिए सैन्य कार्रवाई हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने गोवा…
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संविधान सभी को जोड़ने वाली भावना का प्रतीक-डॉ. मोहन भागवत

समग्र समाचार सेवा पट्टी कल्याण, समालखा | 06 दिसंबर:अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा 05 से 07 दिसंबर 2025 तक माधव सेवा न्यास, पट्टी कल्याण, समालखा (पानीपत) में ‘भारतीय इतिहास, संस्कृति और संविधान’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया जा रहा…
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दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति की दिल्ली हवेली, जहां हो रही है पुतिन की मेजबानी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान हैदराबाद हाउस मुख्य स्थल 170 करोड़ रुपये (2023 मूल्य) की लागत से बना था यह महल ब्रिटिश दौर में 21-गन-सल्यूट राज्य हैदराबाद के निज़ाम ने बनवाया था…
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इतिहास, संस्कृति और संविधान: भारत की पहचान का संगम

भारतीय इतिहास और संस्कृति की गहरी छाप संविधान के हर पहलू में देखी जा सकती है। संविधान में न्याय, समानता और लोककल्याण के सिद्धांत भारत की प्राचीन शासन पद्धतियों से प्रेरित हैं। शोधकर्ताओं के लिए शोध सारांश जमा करने की अंतिम तिथि अब…
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बीएचयू की डॉ. प्रियंका सिंह को ‘शारदा शताब्दी सम्मान 2025’

उत्कृष्टता का सम्मान: डॉ. प्रियंका सिंह को उनके 12 वर्षों के शिक्षण अनुभव और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गहन शोध के लिए सम्मानित किया गया। प्रमुख शोध परियोजनाएं: उन्हें भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान…
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बाल वीरांगना मैना कुमारी का बलिदान

ऐतिहासिक बलिदान: 3 सितंबर 1857 को नाना साहब पेशवा की दत्तक पुत्री मैना कुमारी को अंग्रेजों ने जिंदा जला दिया था। अदम्य साहस: 13 वर्षीय मैना ने अपने पिता के बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया, भले ही उन्हें मौत की धमकी दी…
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इतिहास संकलन समिति की दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यशाला

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के विद्वत परिषद की राष्ट्रीय कार्यशाला दिल्ली में संपन्न हुई। कार्यशाला का उद्देश्य भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आख्यानों को स्वदेशी परिप्रेक्ष्य से पुनः स्थापित करना है। देशभर से विद्वानों और…
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ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी एक ग़लत आरोपित तथ्य- कांग्रेसी व वामपंथी इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास…

कांग्रेसी व वामपंथी ग्रास काल के कई इतिहासकारों ने हमारे मूल इतिहास के साथ तो कई छेड़छाड़ तो किया ही है , सनातन हिंदू ग्रंथों को भी अपने विरोध शैलियों से नहीं बख्शा है .
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