संघ शताब्दी समारोह: मोहन भागवत का संतुलन, स्वदेश और स्वावलंबन पर जोर
धर्म संतुलन है: सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि समाज और व्यक्ति के जीवन में संतुलन ही धर्म है, जो हर तरह की अति से बचाता है।
स्वदेशी और स्वावलंबन: उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी को प्राथमिकता देने और पंच परिवर्तन को…
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