क्या हम अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं?
पूनम शर्मा
हर साल 31 दिसंबर की रात जैसे ही घड़ी बारह बजाती है, पूरा देश “हैप्पी न्यू ईयर” के नारों से गूंज उठता है। आतिशबाज़ी, पार्टियाँ, शराब और शोर—मानो यही नए वर्ष का अर्थ हो। लेकिन क्या हमने कभी ठहरकर यह सोचा है कि जिसे हम नया साल…
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