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fake refugee narrative

“रोहिंग्याओं के रहनुमा या राष्ट्र के दुश्मन? जब झूठ, हमदर्दी और एजेंडे का गठजोड़ बना…

पूनम शर्मा  भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और सामाजिक संतुलन पर जब भी कोई खतरा आता है, तब एक खास वर्ग अचानक "मानवाधिकार" की चादर ओढ़कर प्रकट हो जाता है। इनकी हमदर्दी हमेशा उन्हीं के लिए बहती है जो या तो घुसपैठिए होते हैं, या फिर राष्ट्र-विरोधी…
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