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विजय पाल सिंह

असहज करने वाली गालियों पर हम कितने सहज है

विजय पाल सिंह ​जब एक आम आदमी किसी परिस्थिति में झुझलाता है, उकसाहट में आता है, कारण कुछ भी हो सकता है, किसी बहस में आपा खोता है, तो जुबान के सिरे पर सबसे पहले क्या आता है? कोई नसीहत का शब्द नहीं बल्कि एक गाली। वह गाली किसी विचार, किसी…
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एक सिनेमैटिक हिंदी इमेज

विजय पाल सिंह ​हम अक्सर एक ही जगह होते हैं, एक ही विषय पर बात कर रहे होते हैं, फिर भी बात नहीं बनती। धीरे-धीरे शब्द कम होने लगते हैं, आवाज़ मद्धम पड़ जाती है, और अंत में एक वाक्य हवा में तैर जाता है—"चलो छोड़ो, जाने दो।" हम इसे समझदारी…
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