भारतीय समावेशी समाज पर आधुनिकता की काली छाया
✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल
माना कि परिवर्तन अवश्यंभावी है, नदी के पानी में नहाते हुए स्पर्श होते ही पानी वही नहीं रह जाता जिसने अभी स्पर्श किया था। यह प्रवाह का परिवर्तन है। तालाब के पानी में ऐसा परिवर्तन नहीं होता। एक परिवर्तन बाँध वाले पानी…
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