नई दिल्ली, 30 सितंबर 2020। बाबरी विध्वंस से दो साल पहले 8 जून 1990 को ही सुरेंद्र कुमार यादव ने बतौर मुनसिफ अपनी न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी। उनकी पहली नियुक्ति अयोध्या में हुई थी और 1993 तक वो यहां रहे थे और अयोध्या में 1992 में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था। उन्होंने आज इस बड़े केस पर बतौर सीबीआई विशेष कोर्ट जज फैसला सुनाया है।
लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस केस से सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। इस केस के 32 आरोपियों पर फैसला लिखने के बाद ही सुरेंद्र कुमार यादव अपने कार्यकाल से भी मुक्त हो गए हैं। आज सुरेंद्र कुमार यादव के रिटायरमेंट का दिन है। उनके पास शाम 5 बजे तक का ही वक्त है।
आपके बता दें कि सुरेंद्र यादव का कार्यकाल एक साल पहले यानि रिटायरमेंट की तारीख 30 सितंबर 2019 थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस केस की सुनवाई पूरी करने और इस पर फैसला सुनाने के मकसद से उन्हें एक साल का विस्तार दे दिया था।