समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8अगस्त। सावन माह की शुक्ल पक्ष पञ्चमी को नाग पञ्चमी के रूप में मनाया जाता है। सामान्यतः नाग पञ्चमी का पर्व हरियाली तीज के दो दिवस पश्चात् आता है। वर्तमान में नाग पञ्चमी अंग्रेजी कैलेण्डर में जुलाई अथवा अगस्त माह में आती है. इस पावन पर्व पर, स्त्रियाँ नाग देवता की पूजा करती हैं तथा सर्पों को दुध अर्पित करती हैं। इस दिन स्त्रियाँ अपने भाइयों तथा परिवार की सुरक्षा के लिये प्रार्थना भी करती हैं। श्रावण माह की पञ्चमी तिथि को नाग देवताओं के पूजन के लिये अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. नाग पञ्चमी महत्वपूर्ण दिनों में से एक है तथा यह पर्व श्रावण मास की शुक्ल पक्ष पञ्चमी को मनाया जाता है। यह माना जाता है कि, सर्पों को अर्पित किया जाने वाला कोई भी पूजन, नाग देवताओं के समक्ष पहुँच जाता है. इसलिये लोग इस अवसर पर, नाग देवताओं के प्रतिनिधि के रूप में जीवित सर्पों की पूजा करते हैं।
नाग पञ्चमी पूजा समय
नाग पञ्चमी शुक्रवार, अगस्त 13, 2021 को
नाग पञ्चमी पूजा मूहूर्त – 05:49 ए एम से 08:28 ए एम
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ – अगस्त 12, 2021 को 03:24 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त – अगस्त 13, 2021 को 01:42 पी एम बजे
पूजा मन्त्र
सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले.
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः.
ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
पूजा- विधि-
कई घरों में दीवार पर गेरू पोतकर पूजन का स्थान बनाया जाता है। फिर उस दिवार पर कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे एक घर की आकृति बनाई जाती है और उसके अन्दर नागों की आकृति बनाकर उनकी पूजा की जाती है । साथ ही कुछ लोग घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ हल्दी से, चंदन की स्याही से अथवा गोबर से नाग की आकृति बनाकर उनकी पूजा करते हैं । नागपंचमी का ये त्योहार सर्प दंश के भय से मुक्ति पाने के लिये और कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिये मनाया जाता है | लिहाजा अगर आपको भी इस तरह का कोई भय है या आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो उससे छुटकारा पाने के लिये आज आपको इन आठ नागों की पूजा करनी चाहिए-
वासुकि …. तक्षक …. कालिय …. मणिभद्र ….. ऐरावत ….. धृतराष्ट्र …. कर्कोटक और धनंजय।