बांग्लादेश में जारी हिंसा के बाद भारत की चिंताएं बढ़ीं: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पदस्थ से हटने के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,8अगस्त। बांग्लादेश में जारी हिंसक प्रदर्शन और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अपदस्थ होकर देश छोड़ने के बाद पड़ोसी मुल्क को लेकर भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। पाकिस्तान की तरफ से पहले ही आतंकवाद का दंश झेल रहे भारत को अब बांग्लादेश से भी ऐसे ही खतरे की आशंका जताई जाने लगी है। वर्तमान में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो क्या बांग्लादेश भारत के लिए कांटा बन जाएगा? इस सवाल का जवाब तो अब आने वाला समय ही देगा, लेकिन भारत के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बीते कुछ वर्षों में वह अपने पड़ोसी और सहयोगी देशों को एक-एक कर खोता जा रहा है। भारत के पड़ोसी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय संबंध भी बिगड़ते जा रहे हैं।

पड़ोसी मुल्कों के साथ भारत के बिगड़ते संबंध?
देश में लोकसभा चुनाव हुए अभी कुछ ही महीने हुए हैं, जिसमें बीजेपी को बहुमत न मिलने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए सहयोगियों की मदद से तीसरी बार केंद्र में पहुंचे। पीएम मोदी 2014 से देश की सत्ता संभाल रहे हैं, और उनके कार्यकाल में महंगाई और बेरोजगारी समेत कई समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। आवश्यक वस्तुओं की बढ़ी कीमतें, टैक्स और महंगाई ने मिडिल क्लास की कमर तोड़ रखी है। हालांकि, देश अर्थव्यवस्था की पटरी पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन कई समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। ऐसी ही एक बड़ी परेशानी है पड़ोसी मुल्कों के साथ भारत के बिगड़ते संबंध।

एस जयशंकर के कार्यकाल में देश ने खोए पांच सहयोगी
वर्तमान विदेश मंत्री एस जयशंकर का यह दूसरा कार्यकाल है, लेकिन उनके विदेश मंत्री रहते पिछले पांच वर्षों में भारत ने अपने पांच सहयोगियों को खो दिया है। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार भारत के लिए बड़ी सहयोगी थी, लेकिन अब वहां भी हालात खराब हो गए हैं और नई सरकार के साथ भारत के संबंध किस तरह होंगे, यह बड़ा सवाल है। वहीं, पाकिस्तान के साथ रिश्ते शुरू से ही अच्छे नहीं रहे हैं और श्रीलंका के साथ भी रिश्ते ऐसे ही हो सकते हैं। बीते दिनों मालदीव के साथ भी रिश्ते बिगड़ गए, जो पहले कभी भारत के भरोसेमंद हुआ करते थे।

नेपाल, अफगानिस्तान और भूटान से भी संबंधों में कड़वाहट!
पड़ोसी देश नेपाल की बात करें तो उसके साथ भी रिश्ते उतने अच्छे नहीं हैं, जितने शुरुआत में हुआ करते थे। जबकि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद उस देश के साथ संबंधों पर भी असर पड़ा है। वर्तमान में भारत और भूटान के साथ रिश्ते काफी अच्छे हैं, लेकिन चीन के साथ बढ़ती भूटान की करीबी भी चिंता का कारण है। अक्टूबर 2021 में चीन और भूटान ने ‘थ्री-स्टेप रोडमैप’ के समझौते पर दस्तखत किए थे। चीन की हमेशा से यह रणनीति रही है कि जो देश भारत के साथ सीमा साझा करते हैं, उनसे वह अपने द्विपक्षीय संबंधों को खराब नहीं करना चाहता, वहीं दूसरी ओर एक-एक करके भारत अपने सहयोगियों को खोता जा रहा है।

भारत के लिए चुनौतियां और संभावित समाधान
भारत को अपनी कूटनीतिक नीतियों में सुधार लाने और अपने पड़ोसियों के साथ संबंध मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके लिए भारत को आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, और राजनीतिक संवाद को प्राथमिकता देनी होगी। इसके अलावा, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए भारत को बहुपक्षीय मंचों पर अधिक सक्रियता दिखानी होगी।

बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को सुधारने के लिए एक नई रणनीति की आवश्यकता है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सके।

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