समग्र समाचार सेवा
काठमांडू(नेपाल ) 9 सितंबर -नेपाल सरकार ने 26 प्रमुख सोशल मीडिया ऐप्स और मैसेजिंग सेवाओं पर लगाया गया प्रतिबंध वापस ले लिया है। यह फैसला सोमवार को राजधानी काठमांडू और अन्य शहरों में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद लिया गया, जिनमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हुए।
सूचना एवं संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने घोषणा की कि अब सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लिया है, अब ये सभी सेवाएँ चालू हैं।”
‘जेन ज़ी’ आंदोलन और युवा आक्रोश
सोमवार को हजारों युवा सड़कों पर उतरे। इन्हें “जेन ज़ी” प्रदर्शन कहा गया, क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल थे। विरोध केवल सोशल मीडिया पर पाबंदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार और रोजगार के अवसरों की कमी के खिलाफ भी गुस्सा झलक रहा था।
24 वर्षीय छात्र युजन राजभंडारी ने कहा, “हम नेपाल में संस्थागत हो चुके भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं।”
काठमांडू में हिंसा और सेना की तैनाती
काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने संसद परिसर में घुसकर बैरिकेड तोड़ दिए और एक एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए वाटर कैनन, लाठीचार्ज और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। हालात बिगड़ने पर सेना को भी तैनात करना पड़ा और राजधानी में कर्फ्यू लगा दिया गया।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भीड़ पर लाइव गोला-बारूद चलाया, जिससे कई मौतें और गंभीर चोटें हुईं। पुलिस ने पुष्टि की कि 19 लोगों की जान गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
एमनेस्टी ने अपने बयान में कहा, “बल प्रयोग केवल उसी स्थिति में होना चाहिए जब यह बिल्कुल आवश्यक हो और इसका उपयोग वैध उद्देश्य की प्राप्ति तक ही सीमित रहे।”
सरकार पर दबाव, गृह मंत्री का इस्तीफ़ा
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि उन्हें हिंसक घटनाओं पर गहरा दुख है और इसके पीछे “स्वार्थी ताकतों की घुसपैठ” ज़िम्मेदार है। सोमवार रात को ही गृहमंत्री ने विरोध प्रदर्शनकारियों की मौत की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दे दिया।
सरकार ने हिंसा की जांच के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है और मृतकों के परिवारों को राहत राशि तथा घायलों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
सोशल मीडिया पाबंदी की पृष्ठभूमि
नेपाल सरकार ने पिछले महीने सोशल मीडिया कंपनियों को नई नीतियों के तहत सात दिन के भीतर पंजीकरण कराने का आदेश दिया था। इसमें स्थानीय संपर्क अधिकारी और शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करने की शर्त शामिल थी।
फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब, स्नैपचैट, पिनटेरेस्ट और एक्स (पूर्व ट्विटर) जैसी कंपनियां समयसीमा पूरी नहीं कर सकीं, जिसके बाद इन्हें ब्लॉक कर दिया गया।
सरकार का कहना है कि नकली आईडी बनाकर इन प्लेटफ़ॉर्म्स का इस्तेमाल नफरत फैलाने, धोखाधड़ी और अन्य अपराधों के लिए किया जा रहा है।
इससे पहले भी नेपाल सरकार ने कई बार लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स को ब्लॉक किया था। जुलाई में टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया गया था। वहीं, पिछले साल टिकटॉक को नौ महीने के बैन के बाद तभी चालू किया गया जब उसने नेपाल के नियमों का पालन करने पर सहमति दी।
विरोध अब भी जारी
हालांकि सोशल मीडिया पर लगा प्रतिबंध हटा लिया गया है, लेकिन सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा। छात्र और युवा “युवाओं का भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन” जैसे नारे लगाते हुए सड़कों पर डटे रहे।
20 वर्षीय छात्रा इक्षमा तुमरोक ने कहा, “हम सरकार के निरंकुश रवैये के खिलाफ हैं। सोशल मीडिया बैन तो केवल एक उदाहरण था, असल समस्या सरकार की सत्तावादी सोच है।”