आरएसएस की समन्वय बैठक में शिक्षा और समाज पर हुई गंभीर चर्चा

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  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति: नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर।
  • सामाजिक चुनौतियाँ: पंजाब में बढ़ते मतांतरण और नशे की समस्या पर चिंता।
  • शताब्दी वर्ष की तैयारी: 2 अक्टूबर 2025 से शताब्दी वर्ष का शुभारंभ, जिसमें पर्यावरण और कुटुंब प्रबोधन जैसे विषयों पर विशेष कार्यक्रम।

समग्र समाचार सेवा
जोधपुर, 09 सितंबर 2025: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक (5-7 सितंबर) का जोधपुर में समापन हुआ। बैठक के बाद, अ. भा. प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने एक पत्रकार वार्ता में शिक्षा, समाज और राष्ट्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला, जिसमें समाज के विविध पहलुओं पर काम करने का संकल्प दोहराया गया है।

शिक्षा के भारतीयकरण पर विशेष ध्यान

सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक में शिक्षा का मुद्दा एक प्रमुख विषय रहा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, विद्या भारती, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, भारतीय शिक्षण मंडल और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुभवों को साझा किया। मातृभाषा को प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक बढ़ावा देने के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा के भारतीयकरण के लिए पुस्तकों के पुनर्लेखन और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर काम चल रहा है, ताकि शिक्षा प्रणाली को अपनी जड़ों से जोड़ा जा सके।

सामाजिक चुनौतियों पर चिंता और समाधान के प्रयास

पत्रकार वार्ता में देश की सामाजिक परिस्थितियों पर भी खुलकर चर्चा हुई। पंजाब में बढ़ते मतांतरण और युवाओं में फैल रहे नशे की गंभीर समस्या पर चिंता जताई गई। इसके समाधान के लिए सेवा भारती और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा चलाए जा रहे समाज जागृति और नशा मुक्ति अभियानों की जानकारी दी गई। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ और नागरिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की गई। हालांकि, पूर्वोत्तर राज्यों में घटती हिंसा और बढ़ते विकास को एक सकारात्मक संकेत माना गया। मणिपुर की हाल की घटनाओं को लेकर संवाद आधारित शांति प्रयासों की सराहना की गई।

जनजातीय क्षेत्रों में नक्सली और माओवादी हिंसा में आई कमी का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, समाज को भ्रमित करने के लिए अभी भी जारी प्रयासों को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही गई। वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा चलाए जा रहे छात्रावासों और जनजातीय अधिकारों के लिए किए जा रहे कार्यों पर भी चर्चा हुई। यह माना गया कि जनजातीय समाज तक भारतीय परंपरा और राष्ट्रीय विचार को पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है।

शताब्दी वर्ष की भव्य तैयारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष (2025) की शुरुआत की तैयारी में है। आंबेकर ने बताया कि इस वर्ष को खास बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों पर विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। 2 अक्टूबर 2025 को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के साथ औपचारिक रूप से शताब्दी वर्ष का शुभारंभ होगा।

महिला सहभागिता पर जोर देते हुए सुनील आंबेकर ने क्रीड़ा भारती द्वारा महिला खिलाड़ियों को योग और ज्ञान से जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” के अंतर्गत महिला कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित 887 कार्यक्रमों का भी जिक्र किया, जो यह दर्शाता है कि संगठनों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

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