नए आपराधिक कानून: न्याय प्रणाली के डिजिटलीकरण पर मंथन

गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में त्वरित और साक्ष्य-आधारित न्याय पर जोर; 50 लाख FIR दर्ज।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJ A) द्वारा भोपाल में तीन नए आपराधिक कानूनों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
  • केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन ने कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रणाली को उपनिवेशवाद से मुक्त कर पीड़ित-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना है।
  • नए कानूनों के तहत अब तक लगभग 50 लाख FIR दर्ज की जा चुकी हैं और 22 लाख साक्ष्य आईडी बनाई गई हैं, जो डिजिटल परिवर्तन का प्रतीक हैं।

समग्र समाचार सेवा
भोपाल, 10 नवंबर: भारत सरकार के गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA), भोपाल ने मिलकर 8-9 नवंबर, 2025 को भोपाल में तीन नए आपराधिक कानूनों पर एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन में देश भर के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 120 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें आपराधिक न्याय प्रणाली के तीन प्रमुख स्तंभों—न्यायपालिका, अभियोजन और पुलिस—का प्रतिनिधित्व शामिल था।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नए कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन की चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना और सुरक्षित, पारदर्शी तथा साक्ष्य-आधारित आपराधिक न्याय प्रणाली की स्थापना करना था, जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य है।

💻 प्रौद्योगिकी है नए कानूनों का आधार: केंद्रीय गृह सचिव

केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन ने राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश ने त्वरित न्याय के एक नए युग में प्रवेश किया है। उन्होंने दोहराया कि नए कानूनों का मूल उद्देश्य भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को उपनिवेशवाद से मुक्त करना और इसे अधिक पीड़ित-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना है।

गृह सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रौद्योगिकी ही नए आपराधिक कानूनों का आधार है। इसका उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही न्यायिक देरी की समस्या का समाधान कर, एक त्वरित और अधिक कुशल न्याय प्रणाली सुनिश्चित करना है। उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के योगदान की सराहना की, जिसने ई-साक्ष्य, ई-समन, सामुदायिक सेवा और न्याय श्रुति जैसे प्रमुख तकनीकी नवाचारों के लिए मॉडल नियमों का मसौदा तैयार किया है।

उन्होंने यह भी बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति नए कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी एकीकरण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

🎯 निरंतर निगरानी और डिजिटलीकरण पर जोर

गृह सचिव ने सभी हितधारकों से सुधारों को निरंतर अपनाने, उनमें लगातार सुधार करने और उन्हें संस्थागत बनाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

उन्होंने राज्यों के लिए निम्नलिखित मुख्य कदम सुझाए:

डेडिकेटेड निगरानी तंत्र: राज्य सरकारों को कार्यान्वयन की प्रगति का आकलन करने और परिचालन संबंधी बाधाओं को पहचानने के लिए समर्पित निगरानी तंत्र स्थापित करने चाहिए।

पूर्ण डिजिटलीकरण: पुलिस विभागों को जाँच और अभियोजन कार्यप्रवाह के पूर्ण डिजिटलीकरण को प्राथमिकता देनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ई-साक्ष्य, ई-समन और ICJS जैसी प्रणालियों का उपयोग डिफ़ॉल्ट मोड के रूप में किया जाए।

न्यायिक अधिकारियों और पुलिस के बीच नियमित फीडबैक लूप को संस्थागत रूप देने पर भी जोर दिया गया, ताकि वास्तविक समय में समस्या समाधान और डिजिटल वर्कफ़्लो में सुधार किया जा सके।

🤝 न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन एक मंच पर: न्यायमूर्ति बोस

राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक, माननीय न्यायमूर्ति श्री अनिरुद्ध बोस ने इस सम्मेलन को एक “अनूठा अवसर” बताया जहाँ आपराधिक न्याय प्रणाली के तीनों स्तंभ—पुलिस, अभियोजन और न्यायपालिका—एक साथ आए। उन्होंने संयुक्त क्षमता निर्माण कार्यक्रम के विचार के लिए गृह मंत्रालय की सराहना की।

न्यायमूर्ति बोस ने कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों का उल्लेख करते हुए नए तकनीकी नवाचारों, ICT एप्लीकेशंस और नए फ्रेमवर्क के साथ तालमेल बनाए रखने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रतिभागियों को नए कानूनी और तकनीकी परिदृश्य के बारे में सीखने, सहयोग करने और अपनी समझ को मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।

📊 कार्यान्वयन की प्रगति: डिजिटल परिवर्तन के आंकड़े

तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत प्रशिक्षण और डिजिटल कार्यान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है:

प्रशिक्षण: 15 लाख से अधिक पुलिस अधिकारियों, 12 हजार अभियोजन अधिकारियों, 43 हजार कारागार अधिकारियों और 18 हजार न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।

FIR और साक्ष्य: भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अब तक लगभग 50 लाख FIR दर्ज की गई हैं, 33 लाख से अधिक आरोप पत्र दायर किए गए हैं और 22 लाख साक्ष्य आईडी बनाई गई हैं।

पीड़ितों को सूचना: 14 लाख से अधिक पीड़ितों को डिजिटल सूचनाओं के माध्यम से Automated केस अपडेट प्राप्त हुए हैं।

इसके अलावा, 26 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा ई-साक्ष्य और 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सामुदायिक सेवा जैसे दंड पर अधिसूचनाएं जारी की गई हैं, जो सुधारों के व्यापक स्तर पर अपनाने का संकेत देती हैं।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.