हिन्दू बेटी बचाओ : जिहादियों से सुरक्षा

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पूनम शर्मा
भारतीय इतिहास में जौहर एक ऐसा शब्द है, जो साहस, बलिदान और अत्याचार के विरोध का प्रतीक बन गया है। मध्यकालीन भारत, विशेषकर मुगल और उससे पहले के सुल्तानकाल में, जब विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा राजपूत राज्यों पर हमले किए जाते थे, तब हिंदू महिलाओं और विशेषकर राजपूत रानियों द्वारा अपनी इज्जत और धर्म की रक्षा के लिए सामूहिक अग्नि-प्रवेश (जौहर) का मार्ग अपनाया जाता था। पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में जहाँ  हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक है, वहाँ की लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन, अपहरण या विवाह जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग नहीं होती, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलना मुश्किल हो जाता है।
परंतु भारत में अभी हाल ही में TCS कांड पर राजदीप सरदेसाई जो पूरे घटनाक्रम को प्यार के मामले की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं । किन्तु प्राप्त स्रोतों के अनुसार TCS की ल़डकियों को मलेसिया बेचने की तैयारी कर रहे थे। इंडियन एक्स्प्रेस जैसे अनेक मीडिया इनके बचाव में आगे आ गए इनको इनका मेहनताना मिल गया लगता है। जो लोग गोदी मीडिया बोलते हैं उन्हें जिहादी मीडिया नजर नहीं आता । भारतीय संस्कृति और संस्कारों को तहस नहस करने के लिए इतना आजकल मीडिया का एक ऐसा हिस्सा सक्रिय है जिसके मूल में जाना आवश्यक है l इनकी फंडिंग जो भी है उसके विषय में सरकार को उचित खोजबीन करनी चाहिए । एक बात अवश्य सही है कि हिंदू के खिलाफ जो भी जिहाद है उसके साथ इस प्रकार के पत्रकारों का संबध अवश्य है l मात्र पत्रकार ही नहीं वकील भी l य़ह एक ऐसा इको सिस्टम अथवा यूँ कहें कि एक तंत्र है जो भारत के हिन्दू के के खिलाफ अनवरत सक्रिय है।

प्रतीकात्मक चिन्हों का वर्जन ,सुरक्षा

इसे समझना सभी के लिए आवश्यक है l यदि धर्म निरपेक्षता के दृष्टिकोण से देखें तो भी भारतीय कंपनियों को कर्मचारियों के पहनने ओढ़ने को लेकर निश्चित करने का अधिकार कहाँ से मिला? Lenskart जैसी कंपनियों को यह अधिकार कहाँ से मिला कि बिंदी जैसी अन्य हिन्दुओं के प्रतीकात्मक चिन्हों को वह खुलेआम वर्जित करें l हिमालय जैसी कंपनियां हिन्दुओं को नौकरी पर नहीं रखती ऐसा भी सुनने में आया है l प्रश्न यह है यदि भारत में रहकर मुसलमानों को हिन्दुओं से मतभेद है तो वह 1947 की तर्ज़ पर भारत से अपनी नागरिकता समाप्त क्यों नहीं कर लेते और किसी इस्लामीक मुल्क में रहना शुरू कर दें l भारत में रहने वाले हिन्दुओं ने आजतक कितने ईसाइयों अथवा मुसलमानों का धर्मांतरण करवाया है l क्या इस प्रकार की घटना ने कभी दृष्टि आकर्षित की है l

सरकार का दायित्व

भारत की चुनी हुई सरकार जो संभवतः शत प्रतिशत हिन्दू है क्यों अबतक चुप है l भारत में रहने वाले हिन्दू किस प्रकार सुरक्षित हो सकते है यह सुनिश्चित करना समय की माँग है l अजमेर कांड, छागुर कांड ,अमरावती कांड एवं अनगिनत घटनाएँ जिनमें केरला स्टोरी, एवं केरला स्टोरी 2 जो कि सत्य घटनाओं पर आधारित है l चाहे वह नूह की घटनाएँ हों भूमि जिहाद की ऐसी कोई भी घटना क्या अब समय नहीं है हर हिन्दू को सुरक्षित रहने के अधिकार के बारे मे सोचने का l यह उस स्थिति में जब हिन्दुओं की अपनी चुनी हुई सरकार है l भारत की सरकार को हिन्दुओं की सुरक्षा का दायित्व पूर्णरूपेण समझना होगा एवं एक सुरक्षित तंत्र बनाने की आवश्यकता है जिसमें सभी हिन्दू हों उसमे किसी वामपंथ की भी कोई भूमिका नहीं हो l क्योंकि वामपंथ का झुकाव भी अक्सर एक ऐसी व्यवस्था की ओर देखा जाता है जो हिन्दुओं के पक्ष में कतई नहीं l इसका जीता जागता उदाहरण पश्चिम बंगाल है जहाँ कम्युनिस्ट पार्टी के TMC रुपांतरण ने पश्चिम बंगाल को एक मुस्लिम राज्य की श्रेणी में रख दिया l

भारत सरकार को उन मुसलमानों के वोट के अधिकारों को भी समाप्त कर देना चाहिए जो इस प्रकार के कुकृत्यों में लिप्त हों और उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होना चाहिए । भारत के मुसलमानों को यह समझना  आवश्यक है कि यह 1947 का भारत नहीं है । भारत के प्रत्येक हिन्दू को मोपलाह के हिंदुओं के नरसंहार ,डायरेक्ट एक्शन डे के विषय में अपनी बेटियों को अवश्य पढ़ाना चाहिए । यह जागरूकता अत्यंत आवश्यक है ताकि आनेवाली पीढ़ियाँ अपने अस्तित्व पर आने वाले हर खतरे को समझते हुए तैयार रहें ।
हिंदू लड़कियों की सुरक्षा के लिए कानूनी, सामाजिक और सामुदायिक सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं। हालाँकि कुछ क्षेत्रों में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। हर हिन्दू लड़की को सुरक्षित और आत्मनिर्भर वातावरण देने का प्रयास समाज के हर वर्ग की और सरकार की जिम्मेदारी है।

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