- सद्गुरु ने 2026 चुनाव परिणामों को लोकतंत्र का शानदार प्रदर्शन बताया।
- उन्होंने भारत में 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान को लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत कहा।
- पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत और टीएमसी की हार का उल्लेख किया।
- बांग्लादेश की घटनाओं का बंगाल के मतदाताओं पर असर होने की बात कही।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 8 मई : आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों को “लोकतंत्र का शानदार नृत्य” बताते हुए भारतीय मतदाताओं की राजनीतिक जागरूकता और लोकतांत्रिक परिपक्वता की सराहना की है। एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे सक्रिय लोकतंत्रों में से एक बनकर उभरा है, जहां लोग शांत तरीके से लेकिन मजबूती के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।
सद्गुरु ने कहा कि दुनिया के कई देशों में भारत को लेकर यह धारणा बनाई जाती है कि यहां के लोग आधुनिक या पर्याप्त शिक्षित नहीं हैं, लेकिन चुनावी भागीदारी के आंकड़े इस सोच को गलत साबित करते हैं। उनके अनुसार, भारत में कई राज्यों में मतदान प्रतिशत 80 से 92 प्रतिशत तक पहुंचा, जो लोकतंत्र के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “भारतीय जनता हर बात पर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन नहीं करती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लोग अन्याय या भय को स्वीकार कर लेते हैं। जनता सही समय पर बैलेट के जरिए अपना जवाब देती है।”
सद्गुरु ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में मतदाताओं ने स्पष्ट संदेश दिया है। पश्चिम बंगाल में जहां 2021 में 200 से अधिक सीटें जीतने वाली All India Trinamool Congress इस बार सत्ता से बाहर हो गई, वहीं भा ज पा ने 207 सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की।
उन्होंने कहा कि बंगाल के चुनावी रुझानों पर पिछले एक वर्ष में Bangladesh में हुई घटनाओं का भी प्रभाव पड़ा हो सकता है। सद्गुरु के मुताबिक, सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों ने क्षेत्रीय परिस्थितियों को गंभीरता से देखा और उसी आधार पर मतदान किया।
भारत की तुलना अमेरिका जैसे देशों से करते हुए सद्गुरु ने कहा कि वहां मतदान प्रतिशत अक्सर 40 से 45 प्रतिशत के आसपास रहता है, जबकि भारत में बड़ी संख्या में लोग चुनाव प्रक्रिया में भाग लेते हैं। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताया।
सद्गुरु की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश के कई राज्यों में चुनाव परिणामों को राजनीतिक बदलाव और नई पीढ़ी के जनादेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनावों ने कई पुराने समीकरण बदल दिए हैं और आने वाले लोकसभा चुनावों की दिशा भी तय कर सकते हैं।