मध्य प्रदेश : कुनो नेशनल पार्क में छोड़ी गईं बोत्सवाना की दो मादा चीता

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  •  बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीता खुले जंगल में छोड़ी गईं
  •  कुनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता को मिली नई मजबूती
  • भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 57 हुई
  • आनुवंशिक विविधता बढ़ाने में मददगार होंगी नई चीता

समग्र समाचार सेवा
मध्यप्रदेश 11 मई : मोहन यादव ने सोमवार को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीताओं को खुले जंगल में छोड़ दिया। अधिकारियों के मुताबिक यह कदम भारत के महत्वाकांक्षी “प्रोजेक्ट चीता” के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे चीतों की आनुवंशिक विविधता मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने चीताओं को कुनो नदी के पास खुले जंगल क्षेत्र में छोड़ा। इससे पहले दोनों चीताओं को फरवरी में भारत लाए जाने के बाद छोटे बाड़ों में रखा गया था, जहां उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाया गया।

प्रोजेक्ट चीता को मिलेगा बड़ा लाभ

वन अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि बोत्सवाना से लाई गई नई चीताएं भारत में चीता आबादी को स्थिर और मजबूत बनाने में मदद करेंगी। इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ेगी, जो लंबे समय तक प्रजाति संरक्षण के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चीताओं को जंगल में छोड़ने के बाद पार्क का दौरा भी किया और अधिकारियों से संरक्षण कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भारत वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

भारत में अब 57 चीते

अधिकारियों के अनुसार इस साल बोत्सवाना से कुल नौ चीते — छह मादा और तीन नर — भारत लाए गए हैं। इनके आने के बाद भारत में कुल चीतों की संख्या, जिनमें भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं, बढ़कर 57 हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है, यदि संरक्षण और निगरानी का कार्य इसी तरह जारी रहा।

अफ्रीका से भारत तक का सफर

भारत में चीतों को फिर से बसाने की योजना के तहत अफ्रीकी देशों से चीतों को लाया जा रहा है। दशकों पहले भारत में चीते विलुप्त हो चुके थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने “प्रोजेक्ट चीता” शुरू किया, जिसके तहत अफ्रीका से चीतों को लाकर भारत के जंगलों में बसाने का अभियान शुरू किया गया।

कुनो नेशनल पार्क इस परियोजना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है और यहां लगातार निगरानी, चिकित्सा देखभाल तथा वैज्ञानिक अध्ययन किए जा रहे हैं।

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