विकास  कार्य करने के लिए भाषा कभी बाधा नहीं बन सकती : विजय कुमार गुप्ता

असम प्रदेश के नव निर्वाचित विधायक श्री विजय कुमार गुप्ता, सफल व्यवसायी और असम में भाजपा के सबसे वरिष्ठ एवं अनुभवी कार्यकर्ताओं में से एक हैं, श्री गुप्ता ने भाजपा असम इकाई में प्रदेश महासचिव, उपाध्यक्ष, और लंबे समय तक कोर कमेटी सदस्य का दायित्व  संभाला है ,अपने सहज, सरल और ओजपूर्ण व्यक्तित्व के कारण वे न केवल पार्टी के भीतर बल्कि असम के राजनीतिक परिदृश्य में भी एक प्रभावशाली नेता के रूप में जाने जाते हैं। 

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असम के सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जो व्यापारी वर्ग की समस्याओं से लेकर असम आंदोलन और आरएसएस तक, सभी क्षेत्रों में सक्रिय रहे असम के सेन्ट्रल गुवाहाटी विधान सभा क्षेत्र से विजयी विधायक माननीय श्री विजय कुमार गुप्ता  के साथ ग्लोबल गवर्नन्स न्यूज एवं समग्र भारत न्यूज ग्रुप की मैनेजिंग एडिटर पूनम शर्मा द्वारा एक विशेष साक्षात्कार –

प्रश्न 1 : आप राजनीति में क्यों और कैसे आए ?

उत्तर : “ मेरे राजनीतिक जीवन के लिए  1990 का दशक निर्णायक समय रहा है। उस समय असम की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ बहुत ही चुनौतीपूर्ण थीं। एक ओर अलगाववादी ताकतें राज्य की राजनीति और समाज को प्रभावित कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना के सामने गंभीर चुनौतियाँ थीं। मेरा मानना है कि ये ताकतें असम को राष्ट्रीय मुख्यधारा से दूर ले जाने का प्रयास कर रही थीं। साथ ही छात्र जीवन से ही मेरा जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से भी  रहा है। यही वह समय था जब  मुझे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मुरली मनोहर जोशी और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे महान नेताओं से मिलने का सौभाग्य मिला, जब वे असम आए थे। क्योंकि उन दिनों भाजपा के इन नेताओं की असम में लोकप्रियता आज की तरह नहीं थी । इस कारण उन्हें अपने यहाँ बुलाने , उनके साथ बातें करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । उनके विचारों और भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और आदर्शों के प्रति मेरे मन में श्रद्धा थी  एवम एक दृढ़  विश्वास ने जन्म लिया कि असम की समस्याओं, विशेषकर विदेशी घुसपैठ, सामाजिक अस्थिरता और राष्ट्रीय एकता के मुद्दों के समाधान के लिए भाजपा ही  एकमात्र ऐसा दल है जो एक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।भाजपा की राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली सोच, संगठनात्मक अनुशासन और स्वस्थ सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करने की प्रतिबद्धता ने मुझे बहुत प्रभावित किया। इन आदर्शों से प्रेरित होकर मैंने वर्ष 1990 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। तब से मैं पूरी निष्ठा, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ पार्टी और संगठन की सेवा में लगा हुआ हूँ और जनहित एवं राष्ट्रहित के कार्यों में अपना योगदान देता आ रहा हूँ।”

प्रश्न 2. राजनीति में पदार्पण ,भारतीय जनता पार्टी आपकी प्रेरणा रही , सामाजिक कार्यों में भी क्या आप  सक्रिय रहे  ? 

उत्तर : “ मैं बताना चाहता हूँ कि राजनीति में सक्रिय होने से पूर्व  लगभग 35 वर्षों तक मेरी पहचान  सामाजिक कार्यकर्ता और व्यवसायी के रूप में ही रही  है। मैं स्वयं एक व्यापारी हूँ, और असम के व्यापारिक संगठनों में मैंने कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वाहन किया है । मैंने जनरल मर्चेंट्स एसोसिएशन (होलसेल) का अध्यक्ष और कामरूप चैंबर ऑफ कॉमर्स का उपाध्यक्ष रहते हुए काम किया है। अपने व्यापारिक और सामाजिक जीवन के दौरान मैंने विशेष रूप से असम के व्यापारी वर्ग की समस्याओं को लेकर काम किया। 1990 के ही दशक में असम में ऐसी विकट परिस्थितियाँ बन रही थीं, जहाँ बाहर से आए व्यापारियों को भेदभाव और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा था। व्यापारी वर्ग के खिलाफ हिंसा, धमकियाँ और यहाँ  तक कि कई  मामलों में हत्या की घटनाएँ भी हो रही थीं। ऐसे कठिन समय में मैंने व्यापारिक संगठनों के माध्यम से इन घटनाओं का विरोध किया, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाने के लिए प्रयत्न किए । मैंने जनसमर्थन जुटाने, व्यापारियों की समस्याओं को प्रशासन और समाज के सामने रखने, और उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए आवाज उठाने में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा, व्यापारिक संगठनों के जरिए कई सामाजिक सेवा परियोजनाओं का संचालन भी किया तथा कई अभियानों में मैंने नेतृत्व किया।’’

“मेरा मानना है कि व्यापारी वर्ग किसी भी राज्य या देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। असम का व्यापारी वर्ग प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। मैं हमेशा कहता हूँ, “अर्थनीति गणतंत्र का पंचम स्तंभ है।” इसी सोच को आधार बनाकर मैंने असम के व्यापारियों की समस्याओं के समाधान, उनके हितों की रक्षा और आर्थिक गतिविधियों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर काम किया। यही अनुभव बाद में मेरे राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बना।”

प्रश्न 3 .आप भाजपा के सबसे पुराने कार्यकर्ताओं में से एक हैं । पिछले 45 वर्षों में भाजपा में कितना बदलाव आया है ? 

उत्तर : “यह सही है कि राजनीति में आने के बाद मैं असम भाजपा के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं  में स्वयं को गिनता हूँ। जब मैंने भाजपा के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की, उस समय  असम की राजनीति मुख्य रूप से कांग्रेस और असम गण परिषद के इर्द-गिर्द घूम रही थी। आम धारणा थी कि भाजपा कभी असम में सरकार नहीं बना पाएगी, इसलिए पार्टी के कार्यकर्ता भी कम थे और भाजपा की स्थिति भी कुछ विशेष नही थी । हालांकि संख्या कम थी, परंतु  जो कार्यकर्ता जुड़े थे, वे पूरी निष्ठा, समर्पण और विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध थे। वे पार्टी और नेतृत्व पर पूरा विश्वास रखते थे और कठिनाइयों में भी लगातार संघर्ष एवं मेहनत करते थे। मेरा  विश्वास था कि यही समर्पण और संघर्ष भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। अगर इसी जज़्बे के साथ काम किया जाए तो पार्टी को मजबूत बनाया जा सकता है और भाजपा असम की राजनीति में एक अहम स्थान बनाएगी। यही लगन  और संगठनात्मक प्रयास धीरे-धीरे हमें उस गंतव्य  तक ले गए जहाँ आज भाजपा राज्य की प्रमुख राजनीतिक शक्ति बन चुकी है।”

“2014 के बाद शुरू हुए भाजपा के सदस्यता अभियान का मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहता हूँ। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद, जब 2016 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही थीं, तब पार्टी ने संगठन को जमीनी स्तर तक फैलाने के लिए एक बड़ा सदस्यता अभियान शुरू किया गया । उस समय असम भाजपा में मात्र  ढाई लाख सदस्य थे। सौभाग्यवश, इस अभियान का संयोजक बनने का दायित्व मुझ पर रखा गया। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने मुझ पर भरोसा जताते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी। पार्टी का लक्ष्य  सदस्य संख्या को ढाई लाख से बढ़ाकर पच्चीस लाख तक पहुँचाना था । यह एक बहुत बड़ी चुनौती थी, मेरे नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने राज्य के हर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। परिणामस्वरूप सदस्यता संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई और लगभग पच्चीस लाख सदस्य बनाए गए। यह केवल संगठनात्मक सफलता नहीं थी, बल्कि असम में भाजपा के बढ़ते जनाधार और जनता के विश्वास का प्रमाण भी था। यही विस्तार भाजपा की राजनीतिक सफलता की मजबूत नींव बना। फिर दूसरे चरण में मैंने संयोजक रहते हुए सदस्यता अभियान के अंतर्गत इस संख्या को पैंतालीस लाख पर पहुँचाया और आज तो यह बढ़ कर पैंसठ लाख हो चुकी है ।”

प्रश्न 4 . इस चुनाव में अपनी जीत का श्रेय किसको देना चाहेंगे ?

उत्तर : “मैं इस चुनाव की सफलता का पूरा श्रेय अपने समर्पित कार्यकर्ताओं को देता हूँ। उन्होंने जिस निष्ठा और मेहनत से काम किया, वह निस्संदेह सराहनीय है । उसके बाद मैं अपने नेतृत्व का  धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने हर कदम पर मेरा सहयोग किया। चुनाव प्रचार के दौरान  माननीय अमित शाह जी, नितिन गडकरी जी, और श्री सर्वानन्द  सोनोवाल जी भी आए थे,और हमारे माननीय मुख्यमंत्री  श्री हिमन्त बिश्व शर्मा जी ने अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया के ज़रिए मेरे लिए  प्रचार और समर्थन किया। सभाओं में इनकी उपस्थिति ने बहुत सहयोग दिया । भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री दिलीप सैकिया  जी ने भी मुझे बहुत समर्थन और हौसला दिया। मेरी सभा में  भी आए, जिससे मेरा मनोबल  बढ़ा। मैं मानता हूँ कि सबसे पहले हमारे कार्यकर्ता और फिर हमारा दल हमारे समाज तक सही संदेश पहुँचाने में सफल रहे।”

प्रश्न 5 :चुनाव प्रचार में हिन्दी भाषी होने से कोई दिक्कत, उसको कैसे दूर किया ?

उत्तर : “मेरा दृढ़ विश्वास है कि कोई भी विकास  कार्य करने के लिए  भाषा कभी बाधा नहीं बन सकती। अपनी मातृभाषा का सम्मान करना मेरा कर्तव्य है, लेकिन मैं कभी भी भाषा के किसी विवाद के कारण विचलित नहीं हुआ। मैं मानता हूँ कि  भाषा कभी किसी अच्छे कार्य के लिए रुकावट नहीं बन सकती। मेरी जन्मभूमि असम है, और मैंने असम आंदोलन के काल में भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस समय जब मुझे स्वीकार किया गया था, मेरा विश्वास था कि आज भी मुझे समाज स्वीकार करेगा, और वास्तव में मुझे स्वीकार किया गया। मेरे विधानसभा क्षेत्र में तीन मुख्य भाषाई समूह थे—बंगाली, हिंदी और असमिया भाषी।  इन सभी भाषाओं के लोगों ने मुझे समान रूप से समर्थन दिया और वोट देकर विजयी बनाया। जितना भी वोट मिला, उसमें लगभग 90 प्रतिशत वोट मुझे ही मिले। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि भाषा के किसी भी भेदभाव से ऊपर उठकर सभी ने मेरा साथ दिया।” विजय कुमार गुप्ता : “अर्थनीति गणतंत्र का पंचम स्तंभ है "

प्रश्न 6 आपके विधान सभा क्षेत्र की कौन -कौन सी समस्याएँ  हैं ? उसे दूर करने के लिए क्या आपका कोई रोडमैप ?

उत्तर :“मेरे विधानसभा क्षेत्र में 15 वार्ड हैं, जिनमें से 3 पहाड़ी क्षेत्र—11, 12, 13 और 27 नंबर वार्ड—विशेष रूप से पीछे रह गए हैं । वहाँ ऑडिटोरियम जैसी सामुदायिक स्थल नहीं हैं,न ही पर्याप्त धार्मिक स्थल हैं, जो लोगों के सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए जरूरी हैं। सबसे बड़ी समस्या है सड़क, पानी और स्ट्रीटलाइट की कमी। समस्या इतनी गंभीर है कि बारिश के मौसम में बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते। मेरे लिए ये केवल समस्याएँ नहीं, बल्कि मेरे लोगों के जीवन से जुड़ीं  ज़िंदगियाँ हैं। मैंने अपने चुनाव अभियान में इन्हीं मुद्दों को सबसे पहले उठाया और जनता को वचन दिया  कि मैं इन पहाड़ी इलाकों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दूँगा । मैं पूरी निष्ठा और समर्पण से काम कर रहा हूँ ताकि सभी को साफ पानी मिले,बच्चे स्कूल जा सकें , सड़कें मजबूत हों, और सामाजिक-सांस्कृतिक सुविधाएँ  भी विकसित हों। मेरा मानना है कि जब तक ये मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं होंगी, तब तक असली विकास संभव नहीं। मैं अपने क्षेत्र के हर नागरिक के उज्जवल भविष्य के लिए यह लड़ाई अकेले नहीं,  सबके साथ  मिलकर  लड़ना चाहता हूँ ।”

प्रश्न 7 . आपके क्षेत्र में भरलु नदी,  स्लुइस गेट ,बारिश में जलभराव एक बहुत बड़ी समस्या है उसके स्थायी समाधान के लिए आपकी कोई योजना है ?

उत्तर : “भरलु नदी वास्तव में कभी एक स्वच्छ और प्राकृतिक नदी थी, लेकिन अब वह एक नाले में बदल चुकी है। यह आश्चर्य की बात है कि इतनी सरकारें आईं और गईं, फिर भी इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला यह बात मुझे बीच -बीच में अवश्य व्यथित करती है ।  भरलु का संबंध ब्रह्मपुत्र नदी से है—जब भरलु में पानी अधिक होता था, तो वह ब्रह्मपुत्र में चला जाता था, और ब्रह्मपुत्र में पानी अधिक होने पर भरलु में बहता था।  इसके प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश हुई, लेकिन इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी रही। सबसे बड़ी समस्या लोगों में दायित्व शील नागरिकता की भावना की कमी है। लोग प्लास्टिक, कबाड़ और कूड़ा-करकट भरलु नदी में डाल देते हैं, जिससे यह पूरी तरह से प्रदूषित होकर नाले में परिवर्तित हो चुकी है। मेरी इच्छा है कि इस नदी को साफ किया जाए, उसे दोनों ओर से  घेरा जाए ताकि कोई कूड़ा न फेंक सके, और उसके ऊपर एक संभव हो तो  फ्लाईओवर का निर्माण किया जाए । मैं विशेषज्ञों से राय लेकर इस समस्या का स्थाई समाधान खोजने की पूरी कोशिश करूँगा , ताकि नदी का प्रवाह भी  नियंत्रित हो सके और यह पुनः स्वच्छ और सुरक्षित बन सके। मैं सरकार और संबंधित इंजीनियरिंग विभाग से भी आग्रह करूँगा  कि इस महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान दें। मैं इस समस्या हर संभव प्रयास करूँगा, क्योंकि मेरा विश्वास है कि जब हम सब मिलकर काम करेंगे, तभी हमारे क्षेत्र के लोगों का जीवन बेहतर होगा।”

प्रश्न 8  : गुवाहाटी में कानून व्यवस्था को कैसे देखते हैं आप ? विशेषकर रात्रि के समय निर्जन  स्थानों पर मालीगाँव क्षेत्र के अससपास मादक द्रव्यों का सेवन करते युवा दिख जाते हैं । इस समस्या के समाधान के विषय में क्या करेंगे ?

उत्तर : “विधायक बनने के कुछ दिन पश्चात  जब  मैं पान बाजार थाने गया था और वहाँ  ड्रग्स की समस्या पर चर्चा की तो  पुलिस इंचार्ज ने मुझसे कहा कि वे इस बात को लेकर बहुत चिंतित हैं, विशेषकर  हमारे विधानसभा क्षेत्र में यह समस्या सबसे अधिक  है। यहाँ कुछ विभिन्न स्थानों पर इसके अड्डे बने हुए हैं । इसका मुख्य कारण है कि यह एक व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र है, जहाँ असम के बाहर से बहुत लोग आते हैं ,भीड़ बहुत ज्यादा है और अधिकतर इससे नियंत्रण करना कभी -कभी  कठिन हो जाता है  इसका सीधा संबंध इस  समस्या से भी  है कि रेल्वे लाइन के पास बने टेंट, झुग्गी और स्लम में  पुलिस वहाँ  छापे  मारने जाती है, तो  कार्रवाई नहीं कर पाती क्योंकि वह जमीन रेलवे के अधीन आती है । मैंने सोचा कि इस समस्या के समाधान के लिए रेलवे के सर्वोच्च पदाधिकारी एवं मिलकर पुलिस विभाग के साथ मिलकर उन अड्डों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी, जहाँ  ड्रग्स की बिक्री होती है। रेलवे के किनारे बनी इन बस्तियों में ड्रग्स का व्यापार हो रहा है, और यह मेरे एजेंडे में सबसे ऊपर है। कानून-व्यवस्था को मजबूत करना मेरी प्राथमिकता है, और मैं पूरी लगन से इस दिशा में काम कर रहा हूँ ताकि हमारे क्षेत्र को इस बुरी समस्या से मुक्त कराया जा सके।”

प्रश्न 9. समाज का ऐसा कौन सा क्षेत्र है जिसपर आपको कार्य करना अच्छा लगता है ?

उत्तर : “युवा वर्ग”  “युवाओं के व्यक्तित्व का विकास समाज के उज्जवल भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। मैं चाहता हूँ कि युवा साथियों को अपने साथ अधिक से अधिक जोड़ूँ । उनमें अपने संस्कारों का संचार हो जिससे एक सशक्त चरित्र का गठन हो । मैं चाहता हूँ कि उन्हें हमारी वैदिक, पुरातन सभ्यता, जो हमारे गौरवशाली इतिहास की पहचान है , के प्रति गहरी आस्था और जानकारी हो, ताकि उनका व्यक्तित्व मजबूत और दायित्वशील बन सके। यही वह आधार है जिस पर एक जिम्मेदार और सशक्त  समाज का निर्माण होता है।”

“आज के युवा, जिन्हें जनरेशन Z कहते हैं, उनकी सोच  भले ही अलग हो, और चुनाव के दौरान मुझे उनके द्वारा  कई बार ट्रोल भी किया गया , पर मेरा मानना है कि सही संवाद स्थापित कर उन्हें एक सकारात्मक संदेश भी दिया जा सकता है । जब युवा अपने सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को अपनाएँगे, तभी वे न केवल अच्छे नागरिक बनेंगे, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा दे पाएँगे । युवा पीढ़ी को वैदिक ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा और संस्कार प्राप्त करने चाहिए, ताकि वे अपने जीवन में और समाज में एक आदर्श स्थापित  कर सकें। मैं पूरी लगन से चाहता हूँ कि हमारा  युवा इस मार्ग पर चले और अपने साथ-साथ अपने  समाज को  समृद्ध करें।”

प्रश्न 10 . आपका पसंदीदा मंत्रालय अथवा विभाग ?

उत्तर : मैं हमेशा भगवद् गीता के उस श्लोक को याद रखता हूँ—“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”। मेरी पूरी सोच यही रही है कि मेरा उद्देश्य केवल कर्म करना है, फल की चिंता किए बिना। चाहे मैं मंत्री बनूँ  या किसी और पद पर रहूँ  मेरी एक ही सोच रहती  है, कि जो कुछ भी होता है वह प्रभु की इच्छा से होता है। मैं  नियति को मानता हूँ, यह समझता हूँ कि सब कुछ पहले से लिखा हुआ है। हमारा काम पुरुषार्थ करना है, अपनी पूरी मेहनत और ईमानदारी से। भविष्य में मुझे जो भी दायित्व सौंपा जाएगा, मैं उसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाऊँगा । यही मेरा विश्वास और संकल्प है।

प्रश्न 11. असम एवं पश्चिम बंगाल की जीत को क्या मानते हैं हिन्दुत्व की जीत या कुछ और ?

उत्तर :”मेरे विचार में  असम और पश्चिम बंगाल की जीत सिर्फ राज्यों की जीत नहीं, बल्कि पूरे भारत की, भारत की जनता की जीत है  और हमारी सभ्यता और संस्कृति की जीत है। अब भारत और बांग्लादेश के बीच जो लंबी सीमा है, उसे हम अब मजबूती से नियंत्रित करने में सफल होंगे। असम में अभी भी एक नदी का एक  क्षेत्र बचा  है, लेकिन बंगाल की सीमा के नियंत्रण के फलस्वरूप असम और त्रिपुरा तक बांग्लादेशियों की घुसपैठ को अब रोकना संभव हो गया है। मैं सोचता हूँ कि यह परमेश्वर की कृपा है कि अब हम तीनों स्थानों से इस घुसपैठ को बंद कर सकते हैं। मैं हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति की बात नहीं करना चाहता। भारत में रहने वाले सभी लोग हिन्दू हैं, भले ही उनकी पूजा पद्धति अलग हो। स्वभावतः हमारी संस्कृति हिन्दू है, और इसी संस्कृति की रक्षा के लिए बंगाल का चुनाव जीतना एक ऐतिहासिक कदम है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी सरकार अब कोई ढील नहीं रखेगी, बल्कि बहुत सख्ती से पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा को एक सूत्र में बांधकर घुसपैठ से मुक्त करेगी, और हिन्दुत्व की स्थापना भी संभव होगी ।”

प्रश्न 12 .असम में विपक्ष की स्थिति पर आपकी क्या टिप्पणी है ?

उत्तर : “असम में विपक्ष की भूमिका  काफी शोचनीय है। मैं राजनीतिक रूप से खुद को प्रबुद्ध मानता हूँ और इस बात को कहने में कोई संकोच भी नहीं करता कि लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष होना आवश्यक है। एकतरफा राजनीति कभी भी स्वस्थ शासन का आधार नहीं बन सकती। विपक्ष से हमें सीखने को भी मिलता है; उनके उठाए गए सवालों से हम अपने कार्यों में सुधार कर सकते हैं। एकतरफा शासन होने पर कभी-कभी अहंकार भी पनप सकता है, जो ठीक नहीं  है। फिलहाल कांग्रेस की स्थिति असम में  बहुत खराब है, और उन्हें अपनी स्थिति सुधारने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। कांग्रेस में एक गहरा संस्कार और सांस्कृतिक परिवर्तन होना जरूरी है। मैं मानता हूँ कि यह बदलाव ही उन्हें फिर से मजबूत कर सकता है और लोकतंत्र की सही दिशा में ले जा सकता है।”

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