बराक घाटी ने रोशन किया असम का सांस्कृतिक मंच
गुवाहाटी में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शिलचर और श्रीभूमि के कलाकारों की शानदार सफलता
- राज्य स्तरीय नृत्य प्रतियोगिता में शिलचर और श्रीभूमि के कलाकारों की उल्लेखनीय उपलब्धि।
- ‘क’ वर्ग में शिलचर की तनुश्री पाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- ‘ख’ वर्ग में शिलचर की श्रुति विश्वास ने तृतीय स्थान हासिल किया।
- ‘ग’ वर्ग में श्रीभूमि की रीमा देव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- नृत्यांजलि सांस्कृतिक संस्था की गायत्री देव और सोनाली डे के समर्पित प्रशिक्षण का परिणाम है यह सफलता।
- बराक घाटी की समृद्ध कला एवं संस्कृति की परंपरा एक बार फिर स्थापित हुई।
- बराक की कला-संस्कृति का उज्ज्वल उदाहरण
समग्र समाचार सेवा
शिलचर, 15 जून: राज्य स्तरीय नृत्य प्रतियोगिता में शिलचर और श्रीभूमि के नृत्य कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन कर बराक घाटी की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में बराक घाटी असम के किसी भी अन्य क्षेत्र से कम नहीं है।
सफलता के पीछे दो समर्पित शिक्षिकाओं का योगदान
शिलचर की इस उपलब्धि के पीछे नृत्यांजलि सांस्कृतिक संस्था की संस्थापक अध्यक्षा गायत्री देव तथा संस्था की सचिव एवं प्रशिक्षिका सोनाली डे का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासित प्रशिक्षण, वैज्ञानिक शिक्षण पद्धति और मातृत्वपूर्ण देखभाल के परिणामस्वरूप यह सफलता संभव हो सकी है।
गायत्री देव के दीर्घकालीन साधना अनुभव और सोनाली डे के गहन प्रशिक्षण ने विद्यार्थियों को उस स्तर तक पहुंचाया है, जहां रवींद्र नृत्य की प्रत्येक मुद्रा, अंग-संचालन, नेत्राभिनय और भाव-प्रदर्शन में अद्वितीय कलात्मक सौंदर्य झलकता है।
नियमित अभ्यास और सूक्ष्म प्रशिक्षण का परिणाम
प्रतिदिन घंटों तक अभ्यास, ताल-लय-छंद की गहन शिक्षा, मंचीय प्रस्तुति की विशेष तैयारी और भावाभिव्यक्ति के प्रशिक्षण ने विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय कलाकार के रूप में विकसित किया है। उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों ने निर्णायकों की भी भरपूर प्रशंसा अर्जित की।
विजेता प्रतिभागी
‘क’ वर्ग
तनुश्री पाल (शिलचर) — प्रथम स्थान
‘ख’ वर्ग
श्रुति विश्वास (शिलचर) — तृतीय स्थान
‘ग’ वर्ग
रीमा देव (श्रीभूमि) — प्रथम स्थान
यह उपलब्धि केवल शिलचर और श्रीभूमि के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी बराक घाटी के लिए गर्व का विषय है।
प्रतियोगिता में पूरे राज्य से हुई भागीदारी
उल्लेखनीय है कि नृत्य और संगीत की विभिन्न श्रेणियों में असम के अनेक जिलों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के समापन पर विजेताओं को पुरस्कार एवं सम्मान स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए।
बुद्धिजीवी समाज और अभिभावकों की सराहना
शिलचर के बुद्धिजीवी वर्ग और अभिभावकों ने गायत्री देव और सोनाली डे के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि इन दोनों शिक्षिकाओं की अथक साधना और समर्पित प्रशिक्षण के कारण आज बराक घाटी की बेटियां पूरे असम में नृत्य साधना की एक आदर्श मिसाल बन चुकी हैं।
सभी ने आशा व्यक्त की है कि गायत्री देव और सोनाली डे के नेतृत्व में आने वाले समय में बराक घाटी के और अधिक कलाकार राज्य, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर असम का नाम रोशन करेंगे।