शेरों को मत छेड़ो

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 राकेश चंद्र गुप्ता
बिहार में एक बड़ी मशहूर और खरी कहावत है— बिना सोचे-समझे कभी किसी को उंगली नहीं करनी चाहिए, वरना अंजाम बहुत भारी पड़ता है!
लेकिन लगता है श्रीलंकाई खिलाड़ियों को यह देसी फलसफा किसी ने नहीं समझाया, और वो एक सोते हुए शेर को छेड़ने की खौफनाक गलती कर बैठे।

उस दिन सुपर ओवर में वैभव सूर्यवंशी को पहली गेंद पर स्ट्राइक न देने का फैसला कैसा ब्लंडर था, यह उस युवा तूफान ने त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल में अपने बल्ले की गूंज से पूरी दुनिया को बता दिया है।

आज वो तमाम तथाकथित क्रिकेट आलोचक कहीं मुंह छुपाए घूम रहे हैं, जो वैभव को सिर्फ आईपीएल और फ्लैट विकेट का शेर साबित करने पर तुले थे। एकाध मैच में बल्ला क्या खामोश हुआ, लोगों ने मुफ्त का ज्ञान बांटते हुए उसे टी-20 तक सीमित रहने की सलाह दे डाली। उन्हें शायद इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि वैभव सूर्यवंशी वो खौफनाक तूफान है, जो आने से पहले एक डरावनी खामोशी ओढ़े रहता है।

और जब यह तूफान फाइनल के उस हाई-वोल्टेज महामुकाबले में आया, तो श्रीलंकाई खिलाड़ियों को यह सोचने और समझने का मौका भी नहीं मिला कि आखिर उनके साथ हो क्या रहा है! टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंडिया ए के लिए इस युवा डायनामाइट ने ऐसी तबाही मचाई कि दुनिया बस आंखें मलती रह गई। डंके की चोट पर यह साबित हो गया कि फिलहाल इस निडर शेर जैसा खूंखार ओपनर पूरे विश्व क्रिकेट में कोई नहीं है; वो इस वक्त पूरी तरह से मैचलेस हैं।

जरा इस भौकाल की कल्पना कीजिए महज 11 गेंदों में अपना अर्धशतक ठोक कर एक ऐसा अकल्पनीय रिकॉर्ड कायम कर दिया, जिसे सुनकर ही अच्छे-अच्छे गेंदबाजों के पसीने छूट जाएं। अपनी इस महाविनाशकारी पारी में वैभव ने कुल 29 गेंदों का सामना किया और 10 कड़क चौकों व 8 गगनचुंबी छक्कों की बरसात करते हुए 94 रनों का ऐसा बारूदी तांडव मचाया, जिसने पूरे श्रीलंकाई खेमे में दहशत फैला दी।

मैदान पर वैभव का रौद्र रूप कुछ ऐसा था मानो वो पिछले मैच में हुई उस तीखी नोकझोंक का एक-एक हिसाब आज मैदान पर ब्याज समेत चुकता कर रहे हों। उन्होंने विरोधी टीम की हर एक गेंद को अपना जानी दुश्मन समझकर बड़ी बेरहमी से पीटा; उनके चेहरे पर किसी भी गेंदबाज के लिए कोई भी रहम नहीं था। यह सच है कि शतक के इतने करीब पहुंचकर वह आईपीएल की तर्ज पर नर्वस नाइंटीज का शिकार हो गए, लेकिन इस पूरी पारी की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि शतक पूरा करने के लालच में उन्होंने डिफेंसिव या डरपोक क्रिकेट खेलने से साफ इनकार कर दिया।

यह निडर पारी चीख-चीख कर इस बात की गवाही दे रही है कि वैभव सूर्यवंशी बड़े मैचों के वो चैंपियन खिलाड़ी हैं, जो दुनिया के किसी भी खूंखार बॉलिंग अटैक को किसी भी पिच पर दिन में तारे दिखाने का माद्दा रखते हैं।

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