समाचार रिपोर्ट:
दिल्ली 30 जून : भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का हाई स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह पहली बार है जब इस रेलखंड पर हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ट्रेन का 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से परीक्षण किया गया। इस ट्रायल का उद्देश्य ट्रेन की गति, सुरक्षा और तकनीकी प्रदर्शन का मूल्यांकन करना था।
रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की विशेषज्ञ टीम की निगरानी में यह स्पीड ट्रायल दिल्ली के सब्जी मंडी रेलवे स्टेशन से सोनीपत जंक्शन के बीच आयोजित किया गया। ट्रेन सुबह 8:50 बजे सब्जी मंडी स्टेशन से रवाना हुई और लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सुबह 9:20 बजे सोनीपत जंक्शन पहुंची। पूरे परीक्षण के दौरान ट्रेन ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया।
आरडीएसओ के अधिकारियों ने बताया कि हाई स्पीड ट्रायल के दौरान ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम, त्वरण क्षमता, स्थिरता, कंपन, सुरक्षा मानकों तथा अन्य तकनीकी पहलुओं का गहन परीक्षण किया गया। परीक्षण से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर आगे की संचालन प्रक्रिया और आवश्यक सुधारों पर निर्णय लिया जाएगा।
अब तक हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर किया जा रहा था। दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर पहली बार हुए इस ट्रायल को भारतीय रेलवे की हाइड्रोजन आधारित परिवहन परियोजना के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का भविष्य माना जाता है, क्योंकि इसके संचालन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता और केवल जलवाष्प निकलती है। इससे प्रदूषण में कमी आने के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी परीक्षण भी सफल रहते हैं तो भारतीय रेलवे चरणबद्ध तरीके से विभिन्न रेलमार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन शुरू कर सकता है। इससे देश में हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।