भारत सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ाया

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  • 1989 बैच के IFS अधिकारी विक्रम मिस्री का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया।
  • विदेश नीति में निरंतरता और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने यह फैसला लिया।
  • विक्रम मिस्री चीन, स्पेन और म्यांमार में भारत के राजदूत रह चुके हैं।
  • प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय में लंबे अनुभव के कारण उन्हें देश के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञों में गिना जाता है।

समग्र समाचार सेवा 

नई दिल्ली  2 जुलाई : भारत सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के कार्यकाल में एक वर्ष का विस्तार देने का फैसला किया है। वर्ष 1989 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विक्रम मिस्री अब अपने वर्तमान पद पर अगले एक वर्ष तक बने रहेंगे। केंद्र सरकार के इस निर्णय को भारत की विदेश नीति में निरंतरता बनाए रखने और वैश्विक स्तर पर जारी महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलों को गति देने के रूप में देखा जा रहा है।

विक्रम मिस्री देश के सबसे अनुभवी राजनयिकों में गिने जाते हैं। उन्होंने चीन, स्पेन और म्यांमार जैसे महत्वपूर्ण देशों में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा वे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। विदेश नीति, रणनीतिक मामलों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए सरकार ने उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता है। भारत इस समय कई देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, व्यापारिक संबंधों के विस्तार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ऐसे में विदेश सचिव के रूप में विक्रम मिस्री की निरंतर मौजूदगी इन प्रयासों को मजबूती देगी।

विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में भारत की जी-20 के बाद की वैश्विक रणनीति, पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संवाद को आगे बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। ऐसे समय में उनके कार्यकाल का विस्तार विदेश मंत्रालय के लिए स्थिरता और अनुभव का संदेश माना जा रहा है।

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