🐏मेष
सुख के साधन जुटेंगे। कानूनी बाधा दूर होगी। धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। लाभ में वृद्धि होगी। कुसंगति से बचें। परिवार में मांगलिक कार्यक्रमों की चर्चा संभव है। संतान की रोजी-रोटी की चिंता समाप्त होने के योग हैं। व्यापार अच्छा चलेगा’
🐂वृषभ
शत्रु सक्रिय रहेंगे। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। क्रोध पर नियंत्रण रखें। विवाद न करें। उतावली में कोई काम न करें। पुरानी संपत्ति के रख-रखाव पर धन खर्च हो सकता है। सामाजिक, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई की चिंता रहेगी।
👫मिथुन
विवाद से क्लेश होगा। कानूनी अड़चन दूर होगी। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। व्यवसाय ठीक करेगा। व्यापार में नए प्रस्ताव लाभकारी रहेंगे। सही समय पर लिए गए फैसले लाभ दिला सकते हैं। आवास संबंधी समस्या हल होने के योग हैं।
🦀कर्क
शत्रु सक्रिय रहेंगे। घर-बाहर तनाव रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। संपत्ति के कार्य लाभप्रद रहेंगे। भावनात्मक संबंधों में जल्दबाजी में निर्णय न लें। अधिकारी आपकी कार्यशैली से नाराज हो सकते हैं। परिश्रम के अनुरूप सफलता नहीं मिलेगी। संतान की इच्छा पूरी होगी।
🐅सिंह
यात्रा मनोरंजक रहेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी सफल रहेंगे। धनार्जन होगा। पूँजी निवेश संबंधी कार्यों में सावधानी रखें। आत्मविश्वास बना रहेगा। कारोबार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। पारिवारिक समस्याओं को प्राथमिकता से हल करें।
🙎♀️कन्या
दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। भागदौड़ रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। धैर्य रखें। काम का बोझ कम करने के लिए जिम्मेदारियों को बाँटना आवश्यक है। आर्थिक कामों में परेशानी आने की संभावना है। दूसरों के काम में व्यर्थ मीन-मेख न निकालें।
⚖️तुला
प्रयास सफल रहेंगे। कार्य की प्रशंसा होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। व्यस्तता रहेगी। प्रसन्नता बढ़ेगी। कारोबार में वांछित तेजी आने की संभावना रहेगी। विवेक से निर्णय करने पर लाभ एवं सफलता प्राप्त हो सकेगी। नए कार्य का आरंभ लाभदायी रहेगा।
🦂वृश्चिक
लेन-देन में सावधानी रखें। मेहमानों का आगमन होगा। शुभ समाचार मिलेंगे। मान बढ़ेगा। धनार्जन होगा। रोजगार के बेहतर अवसर मिलने से आय बढ़ेगी। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा। प्रसन्नतावर्धक समाचार मिलेंगे। व्यापार में इच्छित लाभ होगा।
🏹धनु
कोई बड़ा कार्य होने से प्रसन्नता रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। मेहनत व लगन से कार्यक्षेत्र में बेहतर सफलता हासिल कर सकेंगे। अपने व्यसनों पर काबू रखना चाहिए। विवाह संबंधी प्रस्ताव आएंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
🐊मकर
कोई मुसीबत आ सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। फालतू खर्च होगा। जोखिम न उठाएं। व्यावसायिक योजना के विस्तार में मित्रों से मदद मिलेगी। पुरानी झंझटों से राहत रह पाएगी। क्रोध एवं उत्तेजना पर संयम रखना होगा। व्यस्तता रहेगी।
🍯कुंभ
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा लाभदायक रहेगी। धनार्जन होगा। घर की चिंता रहेगी। विरोधी भी आपसे प्रभावित होंगे। कला के क्षेत्र में इच्छित सफलता मिलने के योग हैं। सरकारी राज्यपक्ष के कामों में पर्याप्त सावधानी रखें। मित्रों से मदद मिलेगी।
🐟मीन
शत्रु परास्त होंगे। क्रोध पर नियंत्रण रखें। नए अनुबंध हो सकते हैं। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। साझेदारी में शुरू किया गया कार्य लाभ के अवसरों को बढ़ा सकता है। स्थायी संपत्ति खरीदने का मन बनेगा। दांपत्य जीवन में विश्वास बढ़ेगा। कामकाज की गति बनी रहेगी।
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|| जय श्री राम सनातन धर्म कि जय ||
🪷🙏 पंचाग 🙏🪷
🌳🌹🐟🌼🦚🙏🎉🎈🪻🍂
दिनाँक:-10/07/2027,शुक्रवार
दशमी, कृष्ण पक्ष,
आषाढ
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)
तिथि———– दशमी 08:15:45 तक
तिथि– एकादशी 29:22:02(क्षय )
पक्ष————————– कृष्ण
नक्षत्र———- भरणी 13:14:19
योग————– धृति 07:13:45
योग————– शूल 27:49:39
करण——- विष्टि भद्र 08:15:45
करण————– बव 18:52:29
करण———- बालव 29:22:02
वार———————– शुक्रवार
माह———————– आषाढ
चन्द्र राशि—— मेष 18:43:58
चन्द्र राशि—————– वृषभ
सूर्य राशि—————- मिथुन
रितु————————– वर्षा
आयन—————— दक्षिणायन
संवत्सर——————- पराभव
संवत्सर (उत्तर) ——————रौद्र
विक्रम संवत————— 2083
गुजराती संवत————- 2082
शक संवत—————– 1948
कलि संवत—————- 5127
वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:32:23
सूर्यास्त—————- 19:16:40
दिन काल————- 13:44:17
रात्री काल————- 10:16:09
चंद्रास्त—————- 15:10:33
चंद्रोदय————— 25:48:22
लग्न—- मिथुन 23°33′ , 83°33′
सूर्य नक्षत्र—————— पुनर्वसु
चन्द्र नक्षत्र——————-भरणी
नक्षत्र पाया——————- स्वर्ण
🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩
ले—- भरणी 07:42:43
लो—- भरणी 13:14:19
अ—- कृत्तिका 18:43:58
ई—- कृत्तिका 24:11:49
💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= मिथुन 23°12 , पुनर्वसु 1 के
चन्द्र= मेष 21°30 , भरणी 3 हा
बुध = कर्क 28°52 ‘ पुनर्वसु 3 हा
शु क्र= कर्क 06°05, मघा 2 मी
मंगल= वृषभ 13°17 रोहिणी 2 वा
गुरु= कर्क 07°33 पुष्प , 2 हे
शनि=मीन 20°30 ‘ रेवती , 2 दो
राहू=(व) कुम्भ 07°57 शतभिषा, 1 गो
केतु= (व) सिंह 07°57 मघा 3 मू
============================
🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩
राहू काल 10:41 – 12:25 अशुभ
यम घंटा 15:51 – 17:34 अशुभ
गुली काल 07:15 – 08:58 अशुभ
अभिजित 11:57 – 12:52 शुभ
दूर मुहूर्त 08:17 – 09:12 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:52 – 13:47 अशुभ
वर्ज्यम 24:12* – 25:39* अशुभ
प्रदोष 19:17 – 21:21 शुभ
💮चोघडिया, दिन
चर 05:32 07:15 शुभ
लाभ 07:15 – 08:58 शुभ
अमृत 08:58 – 10:41 शुभ
काल 10:41 12:25 अशुभ
शुभ 12:25 – 14:08 शुभ
रोग 14:08 – 15:51 अशुभ
उद्वेग 15:51 – 17:34 अशुभ
चर 17:34 19:17 शुभ
🚩चोघडिया, रात
रोग 19:17 – 20:34 अशुभ
काल 20:34 21:51 अशुभ
लाभ 21:51 23:08 शुभ
उद्वेग 23:08 – 24:25* अशुभ
शुभ 24:25* – 25:42* शुभ
अमृत 25:42* – 26:59* शुभ
चर 26:59* – 28:16* शुभ
रोग 28:16* – 29:33* अशुभ
💮होरा, दिन
शुक्र 05:32- 06:41
बुध 06:41 -07:50
चन्द्र 07:50- 08:58
शनि 08:58 -10:07
बृहस्पति 10:07 -11:16
मंगल 11:16- 12:25
सूर्य 12:25- 13:33
शुक्र 13:33- 14:42
बुध 14:42 -15:51
चन्द्र 15:51- 16:59
शनि 16:59 -18:08
बृहस्पति 18:08 -19:17
🚩होरा, रात
मंगल 19:17 -20:08
सूर्य 20:08 -20:59
शुक्र 20:59- 21:51
बुध 21:51- 22:42
चन्द्र 22:42- 23:33
शनि 23:33 -24:25
बृहस्पति 24:25-25:16
मंगल 25:16 -26:07
सूर्य 26:07 -26:59
शुक्र 26:59- 27:50
बुध 27:50-28:42
चन्द्र 28:42-29:33
🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩
मिथुन > 04:02 से 06:12 तक
कर्क > 06:12 से 08:24 तक
सिंह > 08:24 से 10:44 तक
कन्या > 10:44 से 13:00 तक
तुला > 13:00 से 15:12 तक
वृश्चिक > 15:12 से 17:36 तक
धनु > 17:36 से 19:40 तक
मकर > 19:40 से 21:22 तक
कुम्भ > 21:22 से 23:02 तक
मीन > 23:02 से 00:30 तक
मेष > 00:30 से 02:08 तक
वृषभ > 02:08 से 03:50 तक
=======================
🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll
🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।
15 + 10 + 6 + 1 = 32 ÷ 4 = 0 शेष
पृथ्वी लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l
🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
राहु ग्रह मुखहुति
💮 शिव वास एवं फल -:
25 + 25 + 5 = 55 ÷ 7 = 6 शेष
क्रीड़ायां = शोक, दुःख कारक
🚩भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।
प्रात: 08:16 तक समाप्त
स्वर्ग लोक = शुभ कारक
💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮
*योगिनी एकादशी व्रत (स्मार्त) गृहस्थ
*एकादशीक्षय
💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮
यत्रोदकस्तत्र वसन्ति हंसा-
स्तथव शुष्कं परिवर्जयन्ति ।
नहंतुल्येन नरेण भाव्यं
पुनस्त्यजन्तः पुनराश्र यन्तः ।।
।।चाoनीo।।
हंस वहा रहते है जहा पानी होता है. पानी सूखने पर वे उस जगह को छोड़ देते है. आप किसी आदमी को ऐसा व्यवहार ना करने दे की वह आपके पास आता जाता रहे.
🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩
गीता -: राजविद्याराजगुह्ययोग अo-9
श्लोक:
न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय।
उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु॥7
हे अर्जुन! उन कर्मों में आसक्तिरहित और उदासीन के सदृश (जिसके संपूर्ण कार्य कर्तृत्व भाव के बिना अपने आप सत्ता मात्र ही होते हैं उसका नाम ‘उदासीन के सदृश’ है।) स्थित मुझ परमात्मा को वे कर्म नहीं बाँधते
॥9॥
आचार्य ज्योतिष सचिन पांडे