भारत-यूके व्यापार समझौता लागू
व्हिस्की-ऑटो पर बड़ी शुल्क कटौती और भारतीय निर्यातकों को भारी लाभ, दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय।
- भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता आधिकारिक रूप से लागू, शुल्क युद्ध और वैश्विक व्यापार संकट के बीच ऐतिहासिक कदम।
- स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क 150% से सीधे 75% और ऑटो-प्रसाधन सामान पर शुल्क 22% से शून्य हुआ, धीरे-धीरे और भी कटौती होगी।
- भारतीय निर्यातकों के लिए प्रोसेस्ड फूड, समुद्री उत्पाद, वस्त्र और चमड़ा निर्यात पर बड़ी राहत; शुल्क में उल्लेखनीय कमी से व्यापक बाजार मिलेगा।
- समझौते में तीन साल के लिए भारतीय श्रमिकों को यूके सोशल सिक्योरिटी से छूट, बिना इमिग्रेशन नियमों में ढील के, दोनों सरकारों ने निगरानी तंत्र भी बनाया।
समग्र समाचार सेवा
लंदन/नई दिल्ली | 15 जुलाई : भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement) लगभग एक वर्ष बाद अब आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस समझौते को अब तक का सबसे तेज़ लागू किया गया व्यापार समझौता बताया जा रहा है। यूके के ट्रेड मिनिस्टर क्रिस ब्रायंट के अनुसार, यह दोनों देशों की ऊर्जा और प्रतिबद्धता का परिणाम है।
नए समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 75% रह गया है, और भविष्य में इसमें और कमी आएगी। ऑटोमोबाइल और ब्रिटिश कॉस्मेटिक्स पर आयात शुल्क 22% से शून्य कर दिया गया है, जिससे ब्रिटिश कंपनियों को भारतीय उपभोक्ता बाजार में बड़ी पहुंच मिलेगी। भारतीय निर्यातकों के लिए प्रोसेस्ड फूड पर 70% और समुद्री उत्पादों पर 21.5% शुल्क कटौती, साथ ही वस्त्र और चमड़ा उद्योग को भी फायदा मिलेगा।
तीन साल के लिए भारतीय कर्मचारियों और नियोक्ताओं को यूके में सोशल सिक्योरिटी शुल्क से छूट मिलेगी, जिससे भारतीय कंपनियों को लगभग 4,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। हालांकि, यह व्यवस्था इमिग्रेशन के नियमों में किसी प्रकार की ढील नहीं है। समझौते से दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार में लगभग 25.5 अरब पाउंड की वृद्धि होने की उम्मीद है।