भोपाल की ‘लेडी सिंघम’ एसीपी मोनिका शुक्ला का वायरल बस स्टैंड-ऑफ
मैंने सिर्फ अपना फर्ज निभाया, डरी नहीं'
- एसीपी मोनिका शुक्ला ‘लेडी सिंघम’ के नाम से वायरल
- प्रदर्शनकारी किसानों को बस धकेलने से रोका, बैरिकेडिंग बचाई
- कर्तव्यनिष्ठा, संयम और साहस की मिसाल
- कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्राथमिक कर्तव्य
- लोकतांत्रिक विरोध का समर्थन, लेकिन शांति और कानून के भीतर
समग्र समाचार सेवा
भोपाल | 30 जुलाई :भोपाल की महिला पुलिस अधिकारी और एसीपी (ट्रैफिक एंड क्राइम) मोनिका शुक्ला का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वे प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा धकेली जा रही स्कूल बस के सामने बिना डरे खड़ी दिख रही हैं। इस साहसिक कदम ने उन्हें सोशल मीडिया पर ‘लेडी सिंघम’ की उपाधि दिला दी है।
क्या है मामला?
बुधवार को प्रदर्शनकारी किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने शहर में प्रवेश रोकने के लिए बसों को बैरिकेडिंग के रूप में लगाया था। जब प्रदर्शनकारी बस को धकेलने लगे, तो एसीपी शुक्ला ने साहस के साथ बस के आगे आकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। उन्हें देख प्रदर्शनकारियों ने बस को धकेलना छोड़ दिया।
मोनिका शुक्ला ने NDTV से क्या कहा?
“मैंने जो किया, वह मेरा कर्तव्य था। बस आगे बढ़ती देख, मैंने तुरंत निर्णय लिया और उसके सामने खड़ी हो गई क्योंकि मुझे प्रदर्शनकारियों को रोकना था। हमें संयम से काम करना चाहिए—प्रदर्शनकारी अपराधी नहीं, नागरिक हैं जो अपनी बात रख रहे हैं।”
उन्होंने कहा—”कभी-कभी विरोध में असामाजिक तत्व भी घुस सकते हैं, पर मेरा एकमात्र उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।”
दिल्ली के छात्र आंदोलनों पर भी उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का हक है, लेकिन यह शांति, कानून के दायरे में और आम लोगों की जिंदगी को बाधित किए बिना होना चाहिए।